गेहूं की उन्नत खेती सीमित सिंचाई से संभव
गेहूं की उन्नत खेती सीमित सिंचाई से संभव – आजकल गेहूं की खेती वर्षा आधारित एवं सीमित सिचंाई करके की जा रही है कम पानी की उपलब्धता होने पर गेहूं की कम पानी की आवश्यकता वाली प्रजातियों का चुनाव कर
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
गेहूं की उन्नत खेती सीमित सिंचाई से संभव – आजकल गेहूं की खेती वर्षा आधारित एवं सीमित सिचंाई करके की जा रही है कम पानी की उपलब्धता होने पर गेहूं की कम पानी की आवश्यकता वाली प्रजातियों का चुनाव कर
ऐसे करें हरी-भरी मटर की खेती – मटर एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है। जो हमारे भोजन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसका उपयोग दाल के रुप में, कच्चे दाने एवं भूनकर किया जाता है। महत्वपूर्ण खबर : ऐसे करें
ऐसे करें मसूर की खेती – भूमि एवं तैयारी : दोमट से भारी भूमि मसूर के लिए उपयुक्त होती है। खरीफ फसल की कटाई के बाद 2-3 हल्की जुताई कर नमी संचय के लिए पाटा लगाना चाहिए। मसूर के लिए
भूमि : अच्छे जल निकास वाली रेतीली दोमट या मटियार दुमट भूमि जिसकी उर्वराशक्ति अच्छी हो उपयुक्त रहती है। क्षारीय एवं अम्लीय भूमि में उपज अच्छी प्राप्त नहीं होती। असिंचित क्षेत्रों के लिये भारी किस्म की भूमि जिसमें जलधारण क्षमता
ऐसे करें अलसी की खेती – जलवायु- अलसी की फसल को ठंडे व शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। अलसी के उचित अंकुरण हेतु 25-30 डिग्री से.ग्रे. तापमान तथा बीज बनते समय तापमान 15-20 डिग्री से.ग्रे. होना चाहिए। अलसी के
मसाला तथा औषधीय फसल मैथी – संसार में मसाला उत्पादन तथा मसाला निर्यात के हिसाब से भारत का प्रथम स्थान है। इसलिये भारत को मसालों का घर भी कहा जाता हैं। मसाले हमारे खाद्य पदार्थों को स्वादिष्टता तो प्रदान करते
रबी मौसम में पानी अनुसार फसलें लगायें – किसान भाई रबी मौसम में सिंचाई के विभिन्न स्रोत नलकूप, कुंआ, तालाब, नहर व पानी की उपलब्धता के अनुसार रबी फसलों का चयन करें। महत्वपूर्ण खबर : सब्जी – फलों के न्यूनतम
23 अक्टूबर 2020, शाजापुर।चने की बुवाई रेज्ड बेड पद्धति से करें – शाजापुर कृषि विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ एस.एस. धाकड ने बताया कि चने की बुवाई का उचित समय चल रहा है। किसान भाई बुवाई करते समय अनुषंसित प्रजातियां आर.व्ही.के.जी-101.
गेहूं की गौ आधारित जैविक खेती – जैविक खेती वह सदाबहार कृषि पद्धति है, जो पर्यावरण की शुद्धता, जल व वायु की शुद्धता, भूमि का प्राकृतिक स्वरूप बनाने वाली, जल धारण क्षमता बढ़ाने वाली, धैर्यशील कृत संकल्पित होते हुए रसायनों
फसल एवं उत्पाद विविधिकरण क्यों है आवश्यक ? – कोविड -19 वैश्विक महामारी के रूप में मानव समाज के समक्ष एक गंभीर-चुनौती प्रस्तुत किया है। इस अभूतपूर्व काल-खण्ड ने भारत के समक्ष भी एक गंभीर चुनौती पेश किया है। देश