धान में समय पर निंदाई जरूरी
धान में समय पर निंदाई जरूरी धान में समय पर निंदाई जरूरी – धान की खेती कृषक छिड़काव, कतार एवं रोपा विधि से करते है। छिड़काव एवं कतार विधि से बुवाई वाली फसलों में खरपतवारों की ज्यादा समस्या रहती है।
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
धान में समय पर निंदाई जरूरी धान में समय पर निंदाई जरूरी – धान की खेती कृषक छिड़काव, कतार एवं रोपा विधि से करते है। छिड़काव एवं कतार विधि से बुवाई वाली फसलों में खरपतवारों की ज्यादा समस्या रहती है।
जैविक खाद बनाने के तरीके व लाभ जैविक खाद बनाने की विधियाँ जैविक खाद बनाने के तरीके व लाभ – सघन खेती के इस युग में भूमि की उर्वराशक्ति बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खादों का प्रयोग बढ़ रहा है।
बोनी के बाद का समय महत्वपूर्ण बोनी के बाद का समय महत्वपूर्ण – खरीफ फसलों की बुआई जोरों पर चालू है वर्षा की लुका-छिपी के साथ-साथ बुआई करना ‘तू डाल-डाल मैं पात-पात के समान ही होती है। बुआई करने के
नीम कड़वा है पर है बहुत उपयोगी नीम कड़वा है पर है बहुत उपयोगी – नीम का उपयोग फसलों में लगने वाले अनेक दुश्मन कीटों को मारने व दूर भगाने में कारगर है। जैविक खेती में नीम का अत्यधिक महत्व
खरीफ प्याज की उन्नत कृषि कार्यमाला खरीफ प्याज की उन्नत कृषि कार्यमाला – प्याज एक महत्वपूर्ण सब्जी एवं मसाला फसल है। इसमें प्रोटीन एवं कुछ विटामिन भी अल्प मात्रा में रहते हैं। प्याज में बहुत से औषधीय गुण पाये जाते
रामतिल की खेती रामतिल की खेती – भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जगनी के नाम से मसहूर रामतिल (गुइजोसिया एबीसीनिका) को लघु तिलहनी फसल माना जाता है। रामतिल की खेती भूमि के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। क्योंकि इसके
उड़द, मूंग की खेती और खरपतवार प्रबंधन उड़द, मूंग की उत्पादकता दुगुनी करें – भारत वर्ष में दालें मानव आहार के रूप में विशेष रूप से देश की शाकाहारी जनसंख्या हेतु भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। टिकाऊ कृषि हेतु
पपीता लगाएं, आमदनी बढ़ाएं पौध प्रवर्धन व्यावसायिक रूप से पपीते का प्रवर्धन बीज के द्वारा ही की जाती है, यद्यपि पोध कलम, ऊतक वर्धन (टीषू कल्चर) तरीकों से सफलतापूर्वक प्रवर्धित किये जा सकते हैं। बीज बोना एवं पौधों की संख्या
धान में नील हरित शैवाल से करें नत्रजन उर्वरकों की बचत धान फसल के लिये सबसे अधिक आवश्यकता नत्रजन की होती है। धान की उपज में कमी का मुख्य कारण नत्रजन का भरपूर मात्रा में न मिलना है। रसायनिक उर्वरक
ग्वार की खेती करें ग्वार शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली दलहनी फसल है जो कि एक अत्यन्त सूखा एवं लवण सहनशील है। अत: इसकी खेती असिंचित व बहुत कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती