पशुपालक वैज्ञानिक विधि अपनाकर आय दूनी करें

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महू। गत दिवस पशु-चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय में ‘पशुधन के स्वास्थ्य व उत्पादकता की प्रौन्नति हेतु वैज्ञानिक कार्यनीतियां’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन एवं संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ. वल्लभ भाई कथिरिया, अध्यक्ष राष्ट्रीय कामधेनु आयोग भारत सरकार के मुख्य आतिथ्य, श्री हुकमचंद सांवला, सदस्य, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग एवं डॉ. एम.के. अग्निहोत्री, सहायक महानिदेशक कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के विशेष आतिथ्य व डॉ. आर.पी. एस. बघेल, अधिष्ठाता संकाय, नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर की अध्यक्षता में हुआ। यह अधिवेशन एसोसिएशन ऑफ एनिमल साईंटिस्ट (पशु वैज्ञानिक संगठन) एवं पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय महू के तत्वावधान में आयोजित हुआ। स्वागत भाषण अधिष्ठाता डॉ. मुकेश मेहता एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. बघेल ने संगठन की स्थापना एवं उद्देश्य की जानकारी दी। डॉ. अग्निहोत्री ने अपने उद्बोधन में देशी एवं विदेशी नस्लों की तुलना करते हुए देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

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श्री सांवला ने कहा कि वर्तमान में हर गतिविधि में पाश्चात्य संस्कृति का अतिक्रमण हो रहा है, इस भाव से उभरना होगा और गौमाता की शरण में आना होगा। गौवंश कृषि का आधार है, इसकी क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कथिरिया ने कहा कि यह विडंबना है कि आधुनिकता के नाम पर पीछे लौट रहे हैं। यदि पंचगव्य की उपयोगिता को भली-भांति समझ लिया जाय तो एक समय ऐसा आयेगा कि विज्ञान और तकनीक में हमें विश्व के सिरमोर बनने से कोई रोक नहीं सकता। भारत में गायों की पचास नस्लें है और सब विविधता से भरपूर है। इस अक्षुण्ण संपदा को सहेज लिया जाये तो मानव स्वास्थ्य पर बरसते कहर को रोका जा सकता है।

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कार्यक्रम में डॉ. के.के. सिंह बघेल एवं डॉ. एस.पी. शुक्ला को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, डॉ. आर.पी.एस. बघेल को इमिनेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड, डॉ. आर.के. शर्मा, डॉ. आर.के. सेल्के, डॉ. निलेश शर्मा, डॉ. सी.एस. शर्मा एवं डॉ. जे.के.भारद्वाज को आउट स्टेंडिंग अचिवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त डॉ. एम.के. मेहता, डॉ. मधु स्वामी, डॉ. बी.पी. शुक्ला एवं डॉ. दलजीत छाबड़ा को डिस्टींगविस्ट अवॉर्ड दिये गये। ऑनरेरी फेलो अवॉर्ड डॉ. एम.एन. ब्रह्मभट्ट, डॉ. एस.एस. तोमर, डॉ. संजय कुमार एवं डॉ. विशाल मुद्गल को दिये गए। डॉ. अजय कुमार उपाध्याय, डॉ. यशगोपाल, डॉ. जितेन्द्र वर्मा, डॉ. सिरिश निगम एवं डॉ. सी.बी. पांडे को कार्पोरेट अवॉर्ड से सम्मानित किया। उद्यमी अवॉर्ड डॉ. डी.के. अरोड़ा, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. अनिशा तिवारी एवं डॉ. महेन्द्र सिंह को मिला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निधि श्रीवास्तव ने किया तथा आभार डॉ. आशीष सोनी ने माना।

तकनीकी सत्र

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संगोष्ठी के दूसरे दिन सात तकनीकी सत्र हुए जिसमें 50 वैज्ञानिकों द्वारा शोध पत्र पढ़े गए तथा 47 वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान के परिणामों को पोस्टर द्वारा छ: सत्रों में प्रदर्शित किया। संगोष्ठी संयोजक डॉ. आर.पी.एस. बघेल ने बताया कि श्रेष्ठ आमंत्रित शोध पत्र, युवा वैज्ञानिक एवं उद्यमी अवॉर्ड हेतु भी सत्र आयोजित किए गए। उपरोक्त सत्रों के संचालन में डॉ. दलजीत छाबरा, डॉ. रेशमा जैन, डॉ. राकेश शारदा, डॉ. एस.एस. तोमर, डॉ. आर.के. बघेरवाल एवं डॉ. एस.के. कारमोरे की मुख्य भूमिका रही। विगत दो दिनों में सम्पन्न सत्रों में श्रेष्ठ युवा वैज्ञानिक तथा डॉ. पी.के. सिंह को श्रेष्ठ वैज्ञानिक अवॉर्ड से नवाजा गया। पोस्टर प्रदर्शन में डॉ. रंजित आईच, डॉ. शाविका चौकसे, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. एस.एस.माहोर, डॉ. आर.आर. सेल्के, डॉ. बीपी शुक्ला ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। कार्यक्रम श्री उपेन्द्र धर कलपति वैष्णव विद्यापीठ के मुख्य आतिथ्य एवं डॉ. आर.पी. बघेल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।

समापन सत्र

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राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन एक विशाल पशु पालक संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र के 108 प्रगतिशील पशुपालकों ने भाग लिया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा पशुपालकों की पशुपालन से संबधित विभिन्न जटिल समस्याओं एवं शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री उषाजी ठाकुर, विधायक महू के द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि मनुष्यों में होने वाले विभिन्न प्रकार के गंभीर रोगों से बचाव हेतू हमें अपनी परंपरागत कृषि एवं पशुपालन की विधियों को अपनाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. आर.पी. एस. बघेल ने बताया की पशुपालन की वैज्ञानिक विधि अपनाकर आय में दो गुनी वृद्धि संभव है। इस कार्यक्रम में दस चयनित पशु पालक शंकर दयाल, निक्की सुरेका, डॉ. पन्नालाल पोपण्डिया, मनोज पटेल, गुलाबसिंह, राजेश पटेल, शेरसिंह ठाकुर, जगदीशसिंह सुनेर, वरूण अग्रवाल, दीनदयाल सेंडो, को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी संयोजक डॉ. आर.के. जैन ने बताया कि यह संगोष्ठी पशुपालकों और महाविद्यालय के वैज्ञानिकों के मध्य दूरी को कम करने में सहयोगी रहेगी। संगोष्ठी की सफलता में डॉ. आर. के. बघेरवाल, डॉ. संदीप नानावटी, डॉ. दीपक गांगिल, डॉ. दानवीर यादव, डॉ. विवेक अग्रवाल, डॉ. जितेन्द्र यादव का विशेष सहयोग रहा। अधिष्ठाता डॉ. एम.के. मेहता ने कार्यक्रम की सफलता पर सभी उपस्थित जनों को हार्दिक बधाई प्रेषित की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नानावटी ने किया। आभार डॉ. गांगिल ने माना। यह जानकारी मीडिया प्रभारी डॉ. आर.के. जैन ने दी।

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