कृषि को लाभदायक बनाने के लिए धाकड़ हाईटेक नर्सरी

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सूचना प्रौद्योगिकीकरण के इस दौर में हमारे देश में कृषि को एक नया आयाम प्राप्त हुआ है। इन्टरनेट के इस युग में आज हमारे देश का किसान एवं नवयुवक कृषि को व्यवसायिक तरीके से करने में रुचि ले रहा है। परम्परागत तरीके से की जाने वाली खेती में भी आज नई पद्धतियों को अपना कर सरल बनाया गया है। आज के किसान एवं नवयुवक अन्य विकसित देशों के किसानों से कृषि से बीज बोने से लेकर फसल कटाई तक उपयोग में आने वाले यंत्रों एवं आधुनिक मशीनों को देखा एवं समझा जा रहा है।

आज हमारे यहां नेट हाउस एवं पाली हाउस में सीजन के विपरीत सब्जियों एवं फूलों की खेती की जा रही है। आज इस बदलते हुए दौर में आर्गेनिक खेती ने भी एक अलग पहचान बनाई है। देश के किसानों ने गुणवत्ता युक्त उत्पादन को बढ़ाया है। साथ ही अच्छे बाजार मूल्य प्राप्त करने के लिये उत्पादित फसल की प्रोसेसिंग को भी अपनाया जा रहा है। कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की पिपलौदा तहसील के गांव रियावन में मुख्यत: सोयाबीन गेहूं, चना, मक्का, सरसों, प्याज, लहसुन के साथ-साथ सब्जियों की खेती की जाती है। रियावन में पैदा होने वाली लहसुन ने रियावन का नाम प्रदेश के अलावा देश में भी रोशन किया है। रियावन में धाकड़ बंधुओं द्वारा पिछले 22 वर्षों से अंगूर की खेती की जा रही है। इसके साथ अमरूद, एप्पल, बेर, अनार, अनानास, जैविक (अंजीर) एवं स्ट्राबेरी की खेती की जा रही है। एक ही जगह पर इतनी सारी बागवानी के साथ-साथ धाकड़ बंधुओं के पास 1.5 एकड़ में अतिआधुनिक नर्सरी भी है। यहां पर किचन गार्डन में लगाने के लिये एवं व्यवसायिक तौर पर लगाने के लिये अंगूर की चार किस्में, अंजीर की 6 किस्मों के पौधे तथा सभी प्रकार की सब्जियों के हाईब्रिड पौधे आर्गेनिक तरीके से तैयार किये जाते है। इसके साथ-साथ यहां स्ट्राबेरी के पौधे नर्सरी ट्रे में तैयार किये जाते हैं। इसको लगाने के लिये मिट्टी के द्वारा बैड बनाकर Table Top System Grow bag तथा Soil less Farming विधि का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति को तथा Hydroponic Cultivation कहा जाता है। इस पद्धति का उपयोग कर कम जगह में ज्यादा पौधे लगाकर उत्पादन को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। स्ट्राबेरी के साथ-साथ मिर्ची, टमाटर, धनिया, पालक, बैंगन, पत्तागोभी, फूलगोभी, शिमला मिर्च, तरबूज, खीरा-ककड़ी, भिण्डी आदि सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है।
इस पद्धति का उपयोग कम जमीन वाले किसानों के साथ-साथ शहरों में रहने वाले परिवारों द्वारा अपनी छत, बालकनी या अपने घरों में पड़ी खाली जगहों का उपयोग कर स्ट्राबेरी तथा सब्जियां लगाई जा सकती है। जिससे कि शहरों में परिवार की बचत का अच्छा साधन होने के साथ-साथ अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
धाकड़ हाईटेक नर्सरी में Hydroponic Cultivation तकनीक की जानकारी प्रदान की जाती है इसके लिये हर 15 दिवस में एक बार इसका प्रशिक्षण दिया जाता है तथा नर्सरी पर भ्रमण पर आने वाले किसानों एवं युवा कृषकों को Live Soil less Farming (मिट्टी रहित कृषि) दिखाई जाती है।
अरविन्द बालाराम धाकड़
धाकड़ हाई-टेक नर्सरी, रियावन,
जिला- रतलाम (म.प्र.)
मो. : 9826350889
email : tropicalriyawan@gmail.com

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