एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री को ज्ञापन सौंपा
01 अक्टूबर2026, इंदौर: एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री को ज्ञापन सौंपा – एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन , नई दिल्ली ने गत दिनों श्री जेपी नड्डा , केंद्रीय मंत्री , रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा , जिसमें फ्रेमवर्क फॉर फ़र्टिलाइज़र सेल ( एफएफएस ) की गंभीर समस्याएं ,डीलर मार्जिन में वृद्धि , एफओआर (फ्री ऑन रेल / रोड़ ) डिलीवरी और इंस्पेक्टर राज की समाप्ति जैसे प्रमुख चार बिंदु शामिल थे।
सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि एफओआर का पूर्ण पालन नहीं करने से एफसीओ 1985 का उल्लंघन हो रहा है। जबकि सभी अनुदानित उर्वरकों ( यूरिया /डीएपी ) को रिटेल पॉइंट ( दुकान ) तक एफओआर डिलीवरी करना अनिवार्य है। जबकि कई कंपनियां दुकान तक खाद पहुंचाने से साफ मना कर रही है। दो -तीन कंपनियां कर रही हैं, तो उन्होंने भी किलोमीटर की सीमा तय कर रखी है। इससे रिटेल डीलरों को स्वयं के खर्च पर परिवहन करना पड़ रहा है तथा 10 रु / बोरी गाड़ी खाली करने की हम्माली देना पड़ रही है। ऐसी स्थिति में एमआरपी पर खाद बेचना असम्भव हो गया है।
यूरिया ,डीएपी और एनपीके में अत्यंत कम डीलर मार्जिन का जिक्र करते हुए मांग की है कि बढ़ती महंगाई और परिवहन लागत को देखते हुए बहुत कम है। सरकार के नियमानुसार एनपीके पर न्यूनतम 4 % मार्जिन का प्रावधान है , परन्तु कंपनियां बिलिंग करते समय मात्र 20 रु / बैग देती है। मंत्रालय से उर्वरक कंपनियों के बिलिंग रिकार्ड की जांच की भी मांग की गई है। 8 % डीलर मार्जिन को न्यायसंगत बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार का आयकर विभाग भी डीलरों का 8 % प्रॉफिट रेश्यो मानकर कर का आकलन करता है। जबकि वास्तव में 1 % भी मार्जिन नहीं मिल रहा है।
ज्ञापन में रेट लिस्ट एवं स्टॉक रजिस्टर की अनिवार्यता को समाप्त करने ,अंतर जिला एवं अंतर राज्य बिक्री की अनुमति देने के साथ ही एफएफएस ऑन लाइन बुकिंग में व्यावहारिक बाधाएं एवं कालाबाज़ारी की समस्या का उल्लेख करते हुए हाइब्रिड मोड ( ऑन लाइन और ऑफ़ लाइन दोनों ) को लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा अन्य मांगों में समस्त प्रकार की टैगिंग को तुरंत प्रभाव से बंद करने ,उत्तर प्रदेश , महाराष्ट्र जैसे मॉडलों के अनुसार अन्य उत्पाद जो कंपनियों के नहीं हैं ,उन्हें बेचने की बाध्यता पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने ,पीओएस मशीन से बिल बनने के बाद बिल बुक से बिल बनाने की अनिवार्यता समाप्त करने तथा पीओएस के बिल को ही उर्वरक नियंत्रण आदेश के अंतर्गत फॉर्म एम का बिल मान लेने की भी मांग की गई। देश के 4 लाख उर्वरक विक्रेताओं की आजीविका एवं अस्तित्व से जुड़ी इन समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो सभी लाइसेंस धारक खाद विक्रेता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे , जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन -प्रशासन की रहेगी।
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