ड्रिप-मल्चिंग से धार के किसान की कमाई 3.5 गुना तक बढ़ी, 1.5 एकड़ में टमाटर उगाकर ₹2.5 लाख कमाए
01 अक्टूबर2026, भोपाल: ड्रिप-मल्चिंग से धार के किसान की कमाई 3.5 गुना तक बढ़ी, 1.5 एकड़ में टमाटर उगाकर ₹2.5 लाख कमाए – कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक मार्गदर्शन को बढ़ावा देने के लिए संचालित ‘परियोजना जल धारा’ छोटे और सीमांत किसानों को जल-कुशल तकनीकों के साथ लाभकारी फसल उत्पादन से जोड़ रही है। मध्यप्रदेश के धार जिले के ग्राम फरसपुरा निवासी किसान सुमित भाटिया ने परियोजना से जुड़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया। इससे उनकी 1.5 एकड़ भूमि से होने वाली वार्षिक कृषि आय ₹72 हजार से बढ़कर लगभग ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक पहुंच गई है। ₹2.5 लाख की आय के आधार पर यह वृद्धि करीब 3.5 गुना है।
पहले बारिश पर निर्भर थी खेती
परियोजना से जुड़ने से पहले सुमित भाटिया अपनी 1.5 एकड़ जमीन पर पारंपरिक तरीके से मक्का और कपास की खेती करते थे। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर थी। खेत में बाढ़ विधि से सिंचाई करने के चलते पानी का उपयोग भी प्रभावी तरीके से नहीं हो पाता था। उस समय उनकी सालाना कृषि आय करीब ₹72 हजार तक सीमित थी।
परियोजना से मिला आधुनिक खेती का मार्गदर्शन
‘परियोजना जल धारा’ के तहत कृषि विशेषज्ञों ने किसान के खेत का चयन कर उन्हें आधुनिक और व्यावसायिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी। किसान को पारंपरिक फसलों के साथ उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी क्रम में उन्हें गुणवत्तापूर्ण 1,000 टमाटर पौधे उपलब्ध कराए गए। इसके बाद उन्होंने व्यावसायिक स्तर पर टमाटर की खेती शुरू की।
ड्रिप और मल्चिंग से पानी का बेहतर उपयोग
खेत में प्रिसिजन ड्रिप यानी सूक्ष्म सिंचाई तकनीक अपनाई गई। इसके जरिए पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया गया, जिससे उपलब्ध पानी का बेहतर इस्तेमाल संभव हुआ। इसके साथ प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल किया गया। इससे मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार को नियंत्रित करने और पानी के वाष्पीकरण को कम करने में मदद मिली।
ट्रेलिसिंग से पौधों और फलों को मिला सहारा
टमाटर और लता वर्ग की सब्जियों को सहारा देने के लिए खेत में ट्रेलिसिंग संरचना का उपयोग किया गया। इससे पौधों को बेहतर सहारा मिला। साथ ही फलों की गुणवत्ता में सुधार और रोगों के प्रकोप को कम करने में मदद मिली। किसान को कीट-व्याधि नियंत्रण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और समय पर फसल प्रबंधन के लिए लगातार तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया।
₹72 हजार से बढ़कर ₹2.5 लाख तक पहुंची आय
आधुनिक तकनीकों और व्यावसायिक फसल उत्पादन को अपनाने का असर किसान की आय पर भी दिखाई दिया। सुमित भाटिया की 1.5 एकड़ भूमि से होने वाली वार्षिक कृषि आय ₹72 हजार से बढ़कर लगभग ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक पहुंच गई। ₹2.5 लाख की आय के आधार पर यह वृद्धि करीब 3.5 गुना है। इससे सीमित भूमि और जल संसाधनों के बावजूद जल-कुशल सिंचाई, आधुनिक कृषि तकनीकों और उच्च मूल्य वाली फसलों के जरिए आय बढ़ाने की संभावना सामने आती है। सुमित भाटिया ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया।
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