राज्य कृषि समाचार (State News)

मशरूम से मधुमक्खी पालन तक सीखेंगे रोजगार के हुनर, छत्तीसगढ़ के 27 कृषि विज्ञान केंद्रों में तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर  

12 सितंबर 2026, रायपुर: मशरूम से मधुमक्खी पालन तक सीखेंगे रोजगार के हुनर, छत्तीसगढ़ के 27 कृषि विज्ञान केंद्रों में तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कौशल भारत, आत्मनिर्भर भारत एवं कौशल आधारित रोजगार’ के विजन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं, महिलाओं एवं कृषकों को कौशल, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी क्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से कौशल विकास को मजबूत किया जा रहा है।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम की प्रेरणा से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के मुख्य आतिथ्य और निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस. एस. टुटेजा की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। निदेशालय विस्तार सेवाएं द्वारा ‘कृषि कौशल परिषद, भारत’ के सहयोग से 8 से 12 सितंबर 2026 तक दो बैचों में ‘प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन कार्यक्रम’ आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत विशेष सत्र का भी आयोजन किया गया।

83 प्रतिभागी ले रहे प्रशिक्षण

प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण एवं प्रमाणन कार्यक्रम के पहले बैच में 41 प्रतिभागियों ने 8 से 10 सितंबर तक प्रशिक्षण एवं प्रमाणन प्रक्रिया में भाग लिया। इसमें दो दिन का गहन प्रशिक्षण दिया गया, जबकि तीसरे दिन मूल्यांकन, परीक्षा और मौखिक परीक्षा आयोजित की गई। वहीं, दूसरा बैच 10 से 12 सितंबर तक 42 प्रतिभागियों के साथ शुरू हुआ है। दोनों बैचों के माध्यम से विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित सभी 27 कृषि विज्ञान केंद्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

इन क्षेत्रों में मिलेगा रोजगारपरक प्रशिक्षण

कार्यक्रम में प्रतिभागियों को कौशल पारिस्थितिकी तंत्र, योग्यता पैक, राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक, प्रशिक्षक दक्षता, वयस्क अधिगम, प्रशिक्षण प्रदान करने की प्रक्रिया और मूल्यांकन की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही प्रतिभागियों को उनकी विशेषज्ञता और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न कृषि एवं संबद्ध रोजगार भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें मशरूम उत्पादक, जैविक फसल उत्पादक, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादक, सब्जी उत्पादक, मधुमक्खी पालक, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक, नर्सरी तैयारकर्ता, कृषि मशीनरी प्रदर्शनकर्ता, सूक्ष्म सिंचाई तकनीशियन, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

27 कृषि विज्ञान केंद्रों में तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर

इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षकों का प्रमाणीकरण करना नहीं है, बल्कि 27 कृषि विज्ञान केंद्रों में ‘कृषि कौशल परिषद, भारत’ द्वारा प्रमाणित मास्टर प्रशिक्षकों का सक्षम समूह तैयार करना है। प्रमाणित होने के बाद ये मास्टर प्रशिक्षक ‘मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना’ के तहत संबंधित रोजगार भूमिकाओं में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और कृषकों को व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

कुलपति ने स्वरोजगार से जोड़ने पर दिया जोर

कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अपने उद्बोधन में कौशल प्रशिक्षण को स्वरोजगार, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और कृषि-उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों की तकनीकी विशेषज्ञता को कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए प्रशिक्षण को आय सृजन और व्यावहारिक उद्यम के अवसरों में बदलने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस. एस. टुटेजा ने 27 कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से जिलों की जरूरत, स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण के विस्तार पर प्रकाश डाला। कृषि कौशल परिषद, भारत के आशुतोष पाटिल ने कौशल प्रमाणन तथा प्रमाणित मास्टर प्रशिक्षकों की भविष्य की भूमिका और महत्व पर अपने विचार रखे।

‘छत्तीसगढ़ खेती’ पत्रिका के नए अंक का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान निदेशालय विस्तार सेवाएं द्वारा ‘प्रकाशन परिक्रामी निधि’ से अर्जित लाभांश राशि का चेक विश्वविद्यालय को प्रदान किया गया। साथ ही कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कृषकोपयोगी पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ खेती’ के नवीन अंक का विमोचन किया। यह पहल कृषि तकनीकी ज्ञान के प्रसार और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।

स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यमों को मिलेगा बढ़ावा

इस पहल के माध्यम से भविष्य में कृषि विज्ञान केंद्र स्तर पर मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, नर्सरी, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, कृषि यंत्रीकरण और अन्य स्थानीय कृषि एवं संबद्ध व्यवसायों पर आधारित छोटे उद्यम एवं व्यावसायिक मॉडल विकसित करने की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे प्रदेश के ग्रामीण युवा, महिलाएं और कृषक स्थानीय संसाधनों एवं बाजार की संभावनाओं के अनुसार कौशल प्राप्त कर स्वरोजगार, स्थानीय कृषि-उद्यमिता और आय सृजन की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

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