राज्य कृषि समाचार (State News)

सीहोर: सोयाबीन की फसल में इन रोगों का खतरा, बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने बताई फफूंदनाशक दवाएं

15 सितंबर 2026, सीहोर: सीहोर: सोयाबीन की फसल में इन रोगों का खतरा, बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने बताई फफूंदनाशक दवाएं – सोयाबीन की फसल इस समय फलन एवं पॉड निर्माण की अवस्था में है। इस अवस्था में फसल पर पॉड ब्लाइट, कॉलर रॉट, चारकोल रॉट और राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट जैसे रोगों का प्रकोप हो सकता है। सीहोर जिले के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को इन रोगों से बचाव के लिए उपयुक्त फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है।

चारकोल रॉट से बचाव के लिए करें छिड़काव

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन में चारकोल रॉट के संक्रमण से पौधों की पत्तियां छोटी और पीली होकर बाद में भूरे रंग की हो जाती हैं। इस रोग से बचाव के लिए पायरोक्लोस्टोवीन 333 ग्राम/लीटर SC की 300 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

गर्दन सड़न में इन दवाओं का करें इस्तेमाल

सोयाबीन में गर्दन सड़न रोग गर्म और नम वातावरण में फैलता है। इसके प्रकोप से नवजात पौधों और तनों पर सड़न व विल्ट के लक्षण दिखाई देते हैं। तनों पर लाल-भूरे रंग के सरसों के बीज जैसे गोल-गोल स्क्लेरेशिया बनते हैं और पौधे मुरझाकर गिर सकते हैं। इसके नियंत्रण के लिए पायरोक्लोस्टोबीन 163 ग्राम/लीटर + एपॉक्सीकोनाजोल 50 ग्राम/लीटर SE की 750 मिली मात्रा या कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत + मैन्कोजेब 63 प्रतिशत की 1.25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

पॉड ब्लाइट से बचाव

सोयाबीन में पॉड ब्लाइट रोग फफूंद, बीज और भूमि जनित होता है। लगातार बारिश और अत्यधिक नमी की स्थिति में इसका प्रकोप बढ़ सकता है। इसके नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 25.9 EC की 625 मिली मात्रा या टेब्यूकोनाजोल 10 प्रतिशत + सल्फर 65 प्रतिशत की 1.25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट से ऐसे बचाएं फसल

राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट गर्म और नम वातावरण में भूमि एवं बीज जनित फफूंद से फैलता है। इसके प्रकोप में पत्तियों की निचली सतह पर छोटे या बड़े भूरे रंग के लाल अंडाकार धब्बे बनते हैं। इस रोग के नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 10 प्रतिशत + सल्फर 65 प्रतिशत की 1.25 किलोग्राम मात्रा या पायरोक्लोस्टोबीन 20 प्रतिशत WG की 500 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

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