करनाल से शुरू हुआ “खेत बचाओ अभियान- रबी 2026”, 30 नवंबर तक चलेगा देशभर में अभियान
27 अक्टूबर 2026, करनाल (हरियाणा): करनाल से शुरू हुआ “खेत बचाओ अभियान- रबी 2026”, 30 नवंबर तक चलेगा देशभर में अभियान – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को हरियाणा के करनाल से “खेत बचाओ अभियान- रबी 2026” का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया। यह अभियान आज से शुरू होकर 30 नवंबर तक पूरे देश में चलेगा।
अभियान का मुख्य मकसद मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल बढ़ाना है। इसके साथ ही तिलहन, दलहन और बागवानी मिशनों के जरिए फसल विविधीकरण, धान कटाई के बाद खाली पड़े खेतों का सदुपयोग और फसल अवशेष प्रबंधन पर भी जोर दिया जाएगा। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देना, मिट्टी-पानी का संरक्षण, किसानों की फार्मर आईडी बनवाना तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व किसान क्रेडिट कार्ड के प्रति जागरूकता फैलाना भी इस अभियान के हिस्से हैं।
भागीदारी के आंकड़े
कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस अभियान में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से लगभग एक करोड़ किसानों और प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और आत्मा को मिलाकर कुल 4,150 टीमें मैदान में उतरेंगी।
इन टीमों में 12,000 से ज्यादा वैज्ञानिक और आत्मा कार्यकर्ता शामिल होंगे, जो गांव-गांव जाकर किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और फसल विविधीकरण जैसे विषयों पर जानकारी देंगे।
यह इस साल खेत बचाओ अभियान का दूसरा चरण है। पहला चरण इस वर्ष 1 जून को मध्य प्रदेश से खरीफ सीजन के लिए शुरू हुआ था, जिसमें राज्य के करीब साढ़े नौ लाख किसानों ने हिस्सा लिया था। रबी सीजन के लिए अब यह चरण करनाल से शुरू होकर देश के सभी राज्यों में चलाया जाएगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा और राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय मिलकर गांव स्तर पर किसान संगोष्ठियां, मिट्टी परीक्षण शिविर और जागरूकता अभियान आयोजित करेंगे, ताकि रबी सीजन की बोआई से पहले ज्यादा से ज्यादा किसान संतुलित खाद उपयोग और फसल विविधीकरण की तरफ बढ़ सकें।
किसानों को क्या मिलेगा फायदा
अभियान के दौरान जिन किसानों के खेत की मिट्टी की अब तक जांच नहीं हुई है, उनके नमूने लेकर परीक्षण की सुविधा दी जाएगी। इससे किसानों को पता चल सकेगा कि उनके खेत में किस तत्व की कमी है और उसी के मुताबिक खाद डालने से लागत भी घटेगी और उत्पादन पर भी असर नहीं पड़ेगा।
धान की कटाई के बाद जो खेत कुछ समय के लिए खाली रह जाते हैं, उनमें दलहन, तिलहन या सब्जियों की छोटी अवधि वाली फसलें लगाने की सलाह भी किसानों को दी जाएगी। इसके साथ ही पराली न जलाकर उसे खेत में ही सड़ाने या पशु चारे के रूप में इस्तेमाल करने के तरीके भी किसानों को बताए जाएंगे।
अभियान की टीमें किसानों को फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं से जोड़ने पर भी काम करेंगी, ताकि जिन किसानों ने अब तक इनका फायदा नहीं लिया है, वे भी इनके दायरे में आ सकें। कृषि मंत्रालय का कहना है कि अभियान पूरा होने के बाद राज्यवार प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
करनाल में हुए शुभारंभ कार्यक्रम में हरियाणा के स्थानीय कृषि अधिकारी और वैज्ञानिक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान किसानों को मिट्टी परीक्षण की अहमियत पर संक्षिप्त जानकारी दी गई और आने वाले हफ्तों में जिला स्तर पर होने वाले शिविरों की रूपरेखा भी साझा की गई।
रबी सीजन की बोआई का काम अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए कृषि मंत्रालय का मानना है कि अभियान के जरिए समय पर पहुंचाई गई सलाह किसानों को खाद और बीज पर होने वाले खर्च को बेहतर तरीके से तय करने में मदद करेगी।
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