आम के बगीचों में थ्रिप्स का हमला, कृष्णगिरि के किसानों के लिए टीएनएयू की सलाह
27 अक्टूबर 2026, कृष्णगिरि (तमिलनाडु): आम के बगीचों में थ्रिप्स का हमला, कृष्णगिरि के किसानों के लिए टीएनएयू की सलाह – तमिलनाडु के कृष्णगिरि जिले में आम के बगीचों पर थ्रिप्स कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (टीएनएयू) ने अपनी अक्टूबर 2026 की कीट-रोग पूर्वानुमान रिपोर्ट में इस जिले के आम किसानों को थ्रिप्स से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। कृष्णगिरि जिला आम की खेती के लिए तमिलनाडु के प्रमुख इलाकों में शामिल है।
थ्रिप्स बहुत छोटे आकार के कीट होते हैं, जो पत्तियों और नए फूलों का रस चूसते हैं। इनके हमले से आम की पत्तियां ऊपर से मुड़ने या चमकीली-चांदी जैसी दिखने लगती हैं, और फूल झड़ने की समस्या भी बढ़ जाती है।
थ्रिप्स का असर सिर्फ पत्तियों और फूलों तक सीमित नहीं रहता। अगर समय पर नियंत्रण न किया जाए तो यह कीट छोटे फलों पर भी हमला करता है, जिससे फलों की सतह पर खुरदुरे और भूरे धब्बे पड़ जाते हैं। इससे फल दिखने में खराब लगते हैं और बाजार में उनका भाव घट जाता है।
टीएनएयू के मुताबिक फूल आने के समय और फल बनने की शुरुआती अवस्था में थ्रिप्स का प्रकोप सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इन दोनों चरणों में बगीचों पर खास निगरानी रखनी चाहिए।
दवा और मात्रा
टीएनएयू की सलाह के अनुसार किसान टॉल्फेनपाइरेड 15 प्रतिशत ईसी का छिड़काव कर सकते हैं। इसकी मात्रा 20 मिली प्रति 10 लीटर पानी, यानी लगभग दो मिली प्रति लीटर पानी रखनी चाहिए।
विश्वविद्यालय ने यह भी सलाह दी है कि छिड़काव करते समय पेड़ की नई पत्तियों, फूलों के गुच्छों और नए फलों तक दवा का घोल अच्छी तरह पहुंचे, ताकि कीट का असरदार तरीके से नियंत्रण हो सके।
कब करें छिड़काव
थ्रिप्स का कीट बहुत छोटा होने की वजह से शुरुआती दौर में इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए टीएनएयू की सलाह है कि किसान फूल आने से पहले ही बगीचों का बारीकी से निरीक्षण करें और पत्तियों के नीचे की तरफ भी ध्यान से देखें, जहां थ्रिप्स अक्सर छिपे रहते हैं।
बगीचे में अगर एक-दो पेड़ों पर भी थ्रिप्स का असर नजर आए, तो पूरे बगीचे का सर्वे करना बेहतर रहता है, क्योंकि यह कीट हवा के साथ तेजी से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक फैल सकता है।
विश्वविद्यालय ने यह भी सुझाव दिया है कि एक ही मौसम में एक ही दवा का बार-बार छिड़काव करने से कीट में उस दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बन सकती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर टॉल्फेनपाइरेड के साथ-साथ दूसरी सिफारिश की गई दवाओं को बदल-बदल कर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
कृष्णगिरि आम उत्पादन के लिहाज से तमिलनाडु के अहम जिलों में शामिल है, और यहां के किसानों के लिए फूल और फल दोनों अवस्था में बगीचों की सुरक्षा उनकी सालाना कमाई से सीधे जुड़ी हुई है।
टीएनएयू ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि छिड़काव से पहले दवा की पैकिंग पर लिखी मात्रा और इस्तेमाल का तरीका एक बार जरूर पढ़ लें, और किसी भी तरह की शंका होने पर नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।
बगीचों की नियमित निगरानी और समय पर छिड़काव से थ्रिप्स के प्रकोप को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता है, जिससे फूल और फल दोनों की गुणवत्ता बनी रहती है और किसानों को बाजार में बेहतर भाव मिलने की उम्मीद रहती है।
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