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राज्य कृषि समाचार (State News)

चित्तूर के किसानों ने ड्रोन छिड़काव को बनाया कमाई का जरिया, 400 से ज्यादा किसानों को मिल रही सेवा

27 अक्टूबर 2026, गुंडलापल्ली (चित्तूर, आंध्र प्रदेश): चित्तूर के किसानों ने ड्रोन छिड़काव को बनाया कमाई का जरिया, 400 से ज्यादा किसानों को मिल रही सेवा – चित्तूर जिले के गंगावरम मंडल के गुंडलापल्ली गांव में किसानों के एक समूह ने दवा छिड़काव के लिए ड्रोन का इस्तेमाल शुरू करके इसे अपनी कमाई का भी जरिया बना लिया है। पिछले साल अगस्त में ट्रेनिंग लेने के बाद यह समूह अब 1,500 एकड़ से ज्यादा खेतों में 400 से अधिक किसानों को फीस लेकर ड्रोन से दवा छिड़काव की सेवा दे रहा है।

श्री विनायक ड्रोन यंत्र सेवा केंद्र के नाम से काम कर रहे इस समूह के मुखिया के.जी. तुलसीराम और साथी एन. गणेश कुमार रेड्डी ने अपने गांव कांचरापल्ली से इसकी शुरुआत की थी। ड्रोन खरीदने के लिए उन्होंने अपनी तरफ से दो लाख रुपये लगाए, जबकि सरकार की तरफ से उन्हें 7.84 लाख रुपये की सब्सिडी मिली।

तुलसीराम बताते हैं, “ड्रोन से हम वही काम पांच से दस मिनट में पूरा कर लेते हैं।” पहले जो छिड़काव बैटरी स्प्रेयर से घंटों में होता था, अब ड्रोन की मदद से बहुत कम समय में निपट जाता है।

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गणेश कुमार रेड्डी इसमें एक और फायदा जोड़ते हैं, “ड्रोन से दवा की जरूरत भी बहुत कम हो जाती है।” कम दवा और कम समय लगने से किसानों को दोहरा फायदा मिल रहा है।

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लागत एक-तिहाई तक घटी

इस सेवा का सबसे बड़ा असर लागत पर दिखा है। पपीता की खेती करने वाले किसान मंजूनाथ रेड्डी बताते हैं, “ड्रोन इस्तेमाल करने के बाद लागत घटकर 20 से 25 हजार रुपये तक आ गई है।” पहले बैटरी स्प्रेयर से छिड़काव पर उन्हें प्रति एकड़ 60 से 70 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता था।

अब गुंडलापल्ली और आसपास के गांवों के कई किसान खेत में खुद दवा छिड़काव की मेहनत और लागत से बचने के लिए इस ड्रोन सेवा केंद्र से सीधे संपर्क करने लगे हैं।

तुलसीराम और उनके साथियों ने ड्रोन उड़ाने और उससे छिड़काव करने की बाकायदा ट्रेनिंग ली, इसके बाद ही उन्होंने अपना ड्रोन यंत्र सेवा केंद्र शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने अपने ही गांव और आसपास के खेतों में काम लेना शुरू किया, और धीरे-धीरे जिले के दूसरे गांवों के किसान भी उनसे सेवा लेने लगे।

अब श्री विनायक ड्रोन यंत्र सेवा केंद्र के पास इतना काम है कि वह गंगावरम मंडल के अलावा आसपास के इलाकों के किसानों को भी समय-समय पर सेवा देता है। खेत की दूरी और फसल के हिसाब से किसानों से एक तय फीस ली जाती है, जिससे यह सेवा केंद्र के लिए भी कमाई का जरिया बन गया है।

छोटे किसानों के लिए भी राहत

पहले जिन किसानों के पास अपना स्प्रे पंप या मजदूर जुटाने की सुविधा नहीं थी, वे दवा छिड़काव के लिए काफी परेशान रहते थे। अब वे सिर्फ एक फोन कॉल पर ड्रोन सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं, और तय समय पर उनके खेत में छिड़काव का काम पूरा हो जाता है।

जिले के कृषि अधिकारी भी किसानों को परंपरागत स्प्रे पंप के बदले ड्रोन जैसी नई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि समय, दवा और मजदूरी तीनों की बचत हो सके।

तुलसीराम, गणेश कुमार रेड्डी और उनके साथियों का यह समूह अब चित्तूर जिले में ड्रोन खेती तकनीक की एक पहचान बन गया है। आसपास के गांवों के कई युवा किसान भी उनसे ड्रोन सेवा शुरू करने के तरीके और सरकारी सब्सिडी की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेने पहुंचते हैं।

मंजूनाथ रेड्डी जैसे पपीता किसानों का अनुभव बताता है कि फसल पर नियमित दवा छिड़काव जरूरी होने के बावजूद, सही तकनीक अपनाने से लागत और समय दोनों में बड़ी बचत हो सकती है। इससे खेती की कुल लागत घटने का सीधा फायदा किसान की जेब में जाता है।

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