राज्य कृषि समाचार (State News)

कटनी की रीता ने तकनीक से बदली मछली पालन की तस्वीर, 5 टन उत्पादन से मिला 2.10 लाख का मुनाफा  

17 सितंबर 2026, कटनीकटनी की रीता ने तकनीक से बदली मछली पालन की तस्वीर, 5 टन उत्पादन से मिला 2.10 लाख का मुनाफा – मध्यप्रदेश के कटनी जिले की रीठी तहसील के ग्राम करहिया की रीता श्रीवास्तव ने आधुनिक तकनीक और शासकीय योजना की मदद से मछली पालन को आय का बेहतर जरिया बनाया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से स्थापित पॉण्ड बायोफ्लॉक इकाई से उन्हें एक फसल में करीब 5 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन मिल रहा है और उत्पादन खर्च घटाने के बाद लगभग 2.10 लाख रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।

योजना के सहयोग से स्थापित की बायोफ्लॉक इकाई

रीता श्रीवास्तव ने वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त कर बायोफ्लॉक इकाई स्थापित की। उन्होंने परंपरागत मत्स्य पालन से आगे बढ़कर आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक को अपनाया। इसमें सीमित स्थान में वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है। कलेक्टर आशीष तिवारी ने जन विश्वास अभियान के तहत भ्रमण के दौरान रीता की पॉण्ड बायोफ्लॉक इकाई का अवलोकन किया और उनकी लगन व उद्यमशीलता की सराहना की।

10 हजार मत्स्य बीज से शुरू किया उत्पादन

रीता की इकाई में करीब 10 हजार GIFT तिलापिया मत्स्य बीज का संचयन किया गया। मछलियों की बेहतर वृद्धि और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए नियमित रूप से संतुलित और गुणवत्तापूर्ण फ्लोटिंग फीड दिया जाता है। जल की गुणवत्ता, ऑक्सीजन स्तर और अन्य जरूरी मानकों की नियमित निगरानी करते हुए इकाई का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जा रहा है। लगातार देखभाल और तकनीकी प्रबंधन का परिणाम उत्पादन में दिखाई दिया। करीब 5 से 6 माह की एक फसल अवधि में 5 मीट्रिक टन यानी 5 हजार किलोग्राम मछली का उत्पादन प्राप्त हो रहा है।

एक फसल में 2.10 लाख रुपए का शुद्ध लाभ

मछलियों की बिक्री से प्राप्त आय में से उत्पादन संबंधी खर्च घटाने के बाद रीता को एक फसल में लगभग 2.10 लाख रुपए का शुद्ध लाभ मिल रहा है। वर्ष में दो बार मत्स्य फसल लेने पर उनकी वार्षिक शुद्ध आय लगभग 4.20 लाख रुपए तक पहुंचने की संभावना है। यह आय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ ही गांव में रहकर आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के जरिए स्वरोजगार स्थापित करने का भरोसा भी दे रही है।

मेहनत और तकनीक से मिली सफलता

रीता के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना आत्मनिर्भरता की राह में महत्वपूर्ण सहारा बनी। योजना के सहयोग से उन्हें आधुनिक इकाई स्थापित करने का अवसर मिला और उन्होंने इसका उपयोग पूरी लगन और वैज्ञानिक तरीके से किया। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित आहार, जल गुणवत्ता का बेहतर प्रबंधन और नियमित देखभाल उनकी इकाई की सफलता में महत्वपूर्ण रहे।

ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा

रीता श्रीवास्तव की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि गांव में स्वरोजगार के नए अवसर तलाशने वाली महिलाओं और युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। उन्होंने दिखाया है कि तकनीक को अपनाकर परंपरागत कार्य को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। सीमित क्षेत्र में बायोफ्लॉक तकनीक के जरिए मत्स्य पालन बेहतर उत्पादन और अच्छी आय का माध्यम बन सकता है।

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