बिहार बाढ़: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया फसल नुकसान का हवाई-जमीनी सर्वेक्षण
17 सितंबर 2026, पटना: बिहार बाढ़: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया फसल नुकसान का हवाई-जमीनी सर्वेक्षण – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज एक दिवसीय दौरे पर बिहार पहुंचे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई और जमीनी सर्वेक्षण कर फसल नुकसान का जायजा लिया।
राज्य के 15 जिलों के करीब 50 लाख लोग इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार करीब 55 हजार हेक्टेयर खेती को नुकसान पहुंचा है। धान, गन्ना और मक्का की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित बताई जा रही हैं। सितंबर में अब तक बिहार में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई है, जिससे गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
कैसा रहा दौरे का कार्यक्रम
सुबह करीब साढ़े दस बजे शिवराज सिंह चौहान ने हेलीकॉप्टर से सारण जिले के दिघवारा और पटना जिले के मनेर क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद वे तेरसिया और सरायपुर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने खेतों में उतरकर किसानों से सीधे बातचीत की और फसल के नुकसान को करीब से देखा।
मुख्यमंत्री सचिवालय में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बैठक कर आपदा प्रबंधन की समीक्षा की। इसके बाद केंद्रीय मंत्री मुंगेर के नवाबगढ़ी और भागलपुर स्थित राहत शिविरों में पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की। 17 सितंबर को भागलपुर से पटना लौटने से पहले वे और भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे।
15 जिलों में बाढ़ से 88 प्रखंड और 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, बक्सर, भागलपुर, बेगूसराय, मुंगेर, समस्तीपुर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन जिलों में मुख्य रूप से धान की रोपी जा चुकी फसल और सब्जियों के खेत पानी में डूबे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
राज्य सरकार ने पहले ही जारी की राहत राशि
केंद्रीय मंत्री के दौरे से एक दिन पहले, 15 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए 8,27,472 प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में 579.23 करोड़ रुपये की राहत राशि भेज दी है। हर पात्र परिवार को 7,000 रुपये दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा, “राहत के पात्र कोई भी परिवार वंचित न रहे। सत्यापन के दौरान यदि कोई पात्र परिवार छूट गया है तो एक सप्ताह के भीतर उसे सूची में जोड़ा जाए।” राज्य में फिलहाल 1,200 से ज्यादा सामुदायिक रसोई चल रही हैं, जिनसे करीब 12.8 करोड़ भोजन के पैकेट बांटे जा चुके हैं। बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 21 टीमें तैनात हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक महीने के भीतर सड़कों की मरम्मत, प्रभावित परिवारों की मदद और किसानों को कृषि मुआवजा देने का काम पूरा करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री के दौरे को इसी फसल-नुकसान आकलन की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसके आधार पर आगे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और आपदा राहत कोष से अतिरिक्त सहायता तय होगी। राज्य सरकार पहले ही रबी सीजन 2026-27 से बाढ़ और जलभराव को जोखिम कवर में शामिल करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की घोषणा कर चुकी है, जो अब तक चल रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना की जगह लेगी।
बिहार जैसे बड़े कृषि राज्य में धान और मक्के की खड़ी फसल का नुकसान सीधे खाद्यान्न आपूर्ति और किसानों की आय पर असर डालता है। केंद्रीय मंत्री का दौरा और फसल नुकसान का आधिकारिक आकलन ही तय करेगा कि प्रभावित किसानों को फसल बीमा और अतिरिक्त मुआवजे का कितना लाभ मिलेगा। बाढ़ उतरने के बाद रबी की तैयारी के लिए बीज, उर्वरक और कृषि यंत्रों की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय कृषि-इनपुट कारोबार को भी सक्रिय होना होगा और आपूर्ति श्रृंखला को समय रहते तैयार रखना जरूरी होगा।
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