राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

रबी सीजन 2026-27 की तैयारी तेज, शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों और किसानों को दिए सीधे संवाद के निर्देश

16 सितंबर 2026, नई दिल्ली: रबी सीजन 2026-27 की तैयारी तेज, शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों और किसानों को दिए सीधे संवाद के निर्देश – केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 13 सितंबर को रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को लेकर एक राष्ट्रव्यापी वर्चुअल सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस बैठक में देशभर के कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और वैज्ञानिकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन में झांसी से करीब 100 किसान ऑनलाइन जुड़े। भारतीय चारा एवं चारागाह अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक भी इस चर्चा का हिस्सा बने। बैठक का मुख्य मकसद रबी फसलों की बुवाई से पहले खेती की लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने की रणनीति तैयार करना था।

देश में रबी सीजन अक्टूबर-नवंबर से शुरू होकर अगले साल मार्च-अप्रैल तक चलता है और इसमें गेहूं, चना, सरसों, मटर तथा जौ जैसी फसलें प्रमुख रूप से बोई जाती हैं। खरीफ सीजन की कटाई पूरी होते ही किसान इन्हीं फसलों की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं, इसलिए सितंबर का महीना नीति और मैदानी तैयारी, दोनों के लिहाज से अहम माना जाता है।

गौरतलब है कि इससे पहले जारी तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक बीते सीजन में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 3765.63 लाख टन रहा था, जो अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन बताया गया था। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीतियों का नतीजा बता चुके हैं, और अब रबी सीजन में भी इसी रफ्तार को बनाए रखने पर मंत्रालय का जोर है।

झांसी से जुड़े किसान बुंदेलखंड क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अक्सर सूखे और सीमित सिंचाई साधनों की चुनौती से जूझता रहा है। ऐसे क्षेत्रों के किसानों को सीधे सम्मेलन से जोड़ने का मकसद यही था कि उनकी जमीनी दिक्कतें नीति बनाते समय ध्यान में रखी जा सकें।

किसानों की सीधी भागीदारी पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि रबी सीजन की तैयारी केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें किसानों की सीधी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी सुधार लाना जरूरी है।

मंत्री ने वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को निर्देश दिया कि वे खेती से जुड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी किसानों तक सही समय पर पहुंचाएं। बैठक में गेहूं, चना, सरसों और मटर जैसी प्रमुख रबी फसलों की समन्वित तैयारी पर चर्चा हुई।

देशभर में फैले कृषि विज्ञान केंद्रों का नेटवर्क इस पूरी रणनीति की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि यही केंद्र जिला स्तर पर किसानों तक बीज की उन्नत किस्में, मिट्टी परीक्षण और मौसम आधारित सलाह पहुंचाने का काम करते हैं। बैठक में इस नेटवर्क को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई ताकि हर जिले के किसान तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके।

28-29 सितंबर को होगी विस्तृत बैठक

कृषि मंत्रालय ने बताया कि रबी फसलों की तैयारी को लेकर एक विशेष सम्मेलन 28-29 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस बैठक में क्रियान्वयन की विस्तृत रणनीति और किसानों के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा होगी।

खेती की लागत घटाना, पैदावार में सुधार और समय पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन इस पूरी कवायद के तीन मुख्य आधार बताए गए हैं। मंत्रालय के मुताबिक अगली बैठक में राज्यवार बीज उपलब्धता, उर्वरक आपूर्ति और सिंचाई की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि बुवाई शुरू होने से पहले किसी भी तरह की कमी को समय रहते दूर किया जा सके।

मिट्टी परीक्षण और संतुलित उर्वरक इस्तेमाल पर भी बैठक में जोर दिया गया, क्योंकि रबी फसलों खासकर गेहूं और सरसों में जरूरत से ज्यादा यूरिया के इस्तेमाल से लागत तो बढ़ती है, पर उत्पादन में वैसा फायदा नहीं मिलता। मंत्रालय चाहता है कि केवीके स्तर पर किसानों को मिट्टी की सेहत के हिसाब से सलाह दी जाए, न कि परंपरागत तरीके से हर खेत में एक जैसी खाद डाली जाए।

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