राज्य कृषि समाचार (State News)

धान में पत्ती लपेटक, मक्का में फॉल आर्मीवर्म का खतरा, जानें कौन सी दवा कितनी मात्रा में डालें

05 सितंबर 2026, बलौदाबाजार: धान में पत्ती लपेटक, मक्का में फॉल आर्मीवर्म का खतरा, जानें कौन सी दवा कितनी मात्रा में डालें – कृषि मौसम विज्ञान विभाग की ताजा सलाह के मुताबिक आने वाले दिनों में आसमान में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। खेतों में पर्याप्त नमी और अनुकूल मौसम के चलते धान, अरहर, मक्का और मूंग-उड़द की फसलों में कीट व रोगों के प्रकोप का खतरा बढ़ सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र, भाटापारा और जिला कृषि विभाग ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखते ही सही उपाय अपनाने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेत में एक जगह खड़े होकर फसल देखने के बजाय अलग-अलग जगहों से पौधों का निरीक्षण करें, इससे कीट के शुरुआती हमले की पहचान आसानी से हो जाती है।

धान और अरहर में किन कीट-रोग पर रखें नजर

धान में पत्ती लपेटक कीट की सूंडियां पत्तियों को मोड़कर या लपेटकर उनके भीतर छिप जाती हैं और पत्ती का हरा भाग खुरचकर खाती हैं। इससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखने लगती हैं और ज्यादा प्रकोप होने पर पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता घटकर उपज पर सीधा असर डालती है।

वहीं तना छेदक कीट की सूंडी तने में घुसकर अंदर का हिस्सा खाती है, जिससे पौधे का बीच का हिस्सा सूखने लगता है। इसलिए किसान सिर्फ पत्तियां नहीं, तनों की स्थिति भी जरूर जांचें। इन दोनों का प्रकोप ज्यादा दिखे तो कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

अरहर में तना अंगमारी (स्टेम ब्लाइट) रोग में तने पर भूरे से गहरे भूरे धब्बे दिखते हैं, जो बढ़ने पर तने को सुखा देते हैं और गंभीर हालत में ऊपर की पत्तियां पीली पड़कर मुरझा जाती हैं। इसके लिए ताम्रयुक्त कवकनाशी 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी, या मेटालेक्सिल एमजेड 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर 10-12 दिन के अंतराल पर दो-तीन बार छिड़काव करें।

मक्का और मूंग-उड़द के लिए सलाह

मक्का में फॉल आर्मीवर्म की सूंडियां नई और कोमल पत्तियों तथा पोंगली में छिपकर खाती हैं। शुरुआत में पत्तियों पर छोटे छेद और खुरची हुई सतह दिखती है, और बाद में पोंगली में मल जमा दिखने लगता है। इसके लिए एमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रति लीटर, या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

मूंग-उड़द में भभूतिया (पाउडरी मिल्ड्यू) होने पर पत्तियों पर सफेद चूर्ण जैसी परत दिखती है, इसके लिए घुलनशील गंधक (सल्फर) 3 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। सफेद मक्खी से फैलने वाले पीला चितकबरापन (यलो मोजेक) की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का घोल छिड़कें।

वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि बिना प्रकोप देखे कीटनाशक का छिड़काव न करें। बारिश के दौरान या बारिश की संभावना होने पर छिड़काव से बचें, क्योंकि पानी दवा को धो देता है और असर नहीं होता।

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