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राज्य कृषि समाचार (State News)

महंगी होती थाली ने बढ़ाई पोषण की चिंता, प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के दाम चढ़े

01 सितंबर 2026, भोपाल: महंगी होती थाली ने बढ़ाई पोषण की चिंता, प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के दाम चढ़े – महंगाई का असर अब केवल रसोई के बजट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि परिवारों की रोजाना की थाली में शामिल पोषण पर भी दिखाई देने लगा है। दाल, पनीर, दूध, अंडे, चिकन और मछली जैसे प्रोटीन के प्रमुख स्रोत महंगे होने से सीमित आय वाले परिवारों के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन जुटाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

उपलब्ध उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और क्रिसिल के थाली सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में शाकाहारी थाली की लागत करीब 6 से 8 प्रतिशत, जबकि मांसाहारी थाली की लागत 7 से 9 प्रतिशत तक बढ़ी है। यानी दोनों तरह के भोजन में प्रोटीन हासिल करने का खर्च बढ़ा है।

दाल से चिकन तक बढ़ी कीमत

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अरहर समेत दालों की कीमत में करीब 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद करीब 4.5 प्रतिशत, जबकि सोयाबीन और टोफू लगभग 3.2 प्रतिशत महंगे हुए हैं। मांसाहारी खाद्य पदार्थों में चिकन ब्रेस्ट की कीमत करीब 8.1 प्रतिशत, अंडों की 6.2 प्रतिशत और स्थानीय मछली की कीमत करीब 5.4 प्रतिशत बढ़ने की बात सामने आई है।

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प्रोटीन की मात्रा के लिहाज से भी इन खाद्य पदार्थों की अहमियत है। दो अंडों से लगभग 13 ग्राम, पनीर और डेयरी उत्पादों से करीब 18 ग्राम तथा चिकन ब्रेस्ट से लगभग 22 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। ऐसे में इनकी कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवार के पोषण बजट पर पड़ सकता है।

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वेज थाली में दाल सबसे अहम

भारतीय परिवारों में दाल प्रोटीन का सबसे आम स्रोत है। दाल महंगी होने पर उसका असर सीधे रोजाना के भोजन पर पड़ता है। इसके साथ सब्जी, तेल और मसालों की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो तो पूरी थाली का खर्च बढ़ जाता है। सीमित बजट वाले परिवारों के सामने दाल, दूध और सब्जियों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ सकती है।

अंडे और चिकन से बढ़ी गैर-शाकाहारी थाली की लागत

गैर-शाकाहारी भोजन करने वाले परिवारों के लिए अंडे और चिकन प्रोटीन के लोकप्रिय स्रोत हैं। चिकन की कीमत बढ़ने के पीछे मुर्गियों के दाने की बढ़ती लागत को भी एक कारण माना जाता है। वहीं कुछ बाजार रिपोर्टों में 2026 के दौरान अंडों की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में 35 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि का उल्लेख किया गया है। इसमें पोल्ट्री दाने में इस्तेमाल होने वाले मक्के की कीमत बढ़ना एक प्रमुख कारण बताया गया है।

महंगाई सिर्फ जेब नहीं, पोषण पर भी असर डाल रही

जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत, जबकि खाद्य महंगाई 5.52 प्रतिशत रही। जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखने के लिए देशभर के 555 बाजार केंद्रों से 22 प्रमुख खाद्य वस्तुओं के दाम जुटाए जाते हैं।
 बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनका भोजन बजट पहले से सीमित है। ऐसे में चुनौती केवल यह नहीं है कि थाली कितनी महंगी हुई, बल्कि यह भी है कि बढ़ते खर्च के बीच परिवार अपनी थाली में पर्याप्त प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व कैसे बनाए रखें। हालांकि खाद्य वस्तुओं की कीमतें बाजार और समय के अनुसार बदलती रहती हैं, लेकिन प्रोटीन वाले कई खाद्य पदार्थों के महंगे होने से आम परिवार की पोषण लागत पर दबाव बढ़ना चिंता का विषय है।

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