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राज्य कृषि समाचार (State News)

औषधीय फसलों का हब बना नीमच, 87 हजार हेक्टेयर में फैली उद्यानिकी खेती; ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से देशभर में पहुंच रहे उत्पाद

11 जून 2026, भोपाल: औषधीय फसलों का हब बना नीमच, 87 हजार हेक्टेयर में फैली उद्यानिकी खेती; ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से देशभर में पहुंच रहे उत्पाद – मध्यप्रदेश का नीमच जिला उद्यानिकी और औषधीय फसलों की खेती में लगातार नई पहचान बना रहा है। जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़कर 87,846 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाला, औषधीय एवं सुगंधित फसलों के बढ़ते उत्पादन के साथ-साथ यहां के किसानों के उत्पाद अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के बाजारों तक पहुंच रहे हैं, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

87 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हो रही उद्यानिकी खेती

उप संचालक उद्यानिकी अतरसिंह कन्नौजी ने बताया कि जिले में वर्ष 2025-26 में कुल 87,846 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती की गई है। इनमें फल फसलों का रकबा 10,022 हेक्टेयर, सब्जी फसलों का 10,874 हेक्टेयर, मसाला फसलों का 53,374 हेक्टेयर, औषधीय एवं सुगंधित फसलों का 13,137 हेक्टेयर तथा पुष्प फसलों का 439 हेक्टेयर है।

ODOP योजना से बढ़ी प्रसंस्करण इकाइयां

एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत जिले में कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा मिला है। वर्ष 2020-21 से अब तक 297 इकाइयों की स्थापना के लिए 39.30 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत किया गया है। इनमें से 266 इकाइयों को 33.21 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। वहीं हितग्राहियों को 13.66 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान भी प्रदान किया गया है।

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स्थानीय ब्रांड बना रहे राष्ट्रीय पहचान

नीमच के किसान और उद्यमी अपने उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी बेच रहे हैं। विश्वकर्मा हाईटेक कृषि फार्म, कस्तूरी, मालवा बाइट्स, स्पाईसी जायका, भगत जी मसाला, महारानी मसाला, अग्निपुष्प, अमृत कुम्भ, नरम पुड़ी, गोलचा सेठ और गोपाल कृष्ण जैसे स्थानीय ब्रांड अब अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए उदयपुर, जयपुर, दिल्ली, इंदौर और उज्जैन सहित विभिन्न शहरों में अपने उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं।

औषधीय फसलों की खेती में अग्रणी जिला

नीमच जिला औषधीय फसलों की खेती और विपणन के क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। यहां अश्वगंधा, ईसबगोल, तुलसी, कालमेघ, सफेद मूसली, शतावरी, कलौंजी और चिया जैसी औषधीय फसलों की बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है। यही कारण है कि नीमच को प्रदेश के प्रमुख औषधीय फसल उत्पादक जिलों में गिना जाता है।

संरक्षित खेती को मिल रहा बढ़ावा

जावद विकासखंड के रणावतखेड़ा गांव को संरक्षित खेती क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है। यहां शेडनेट हाउस निर्माण को प्रोत्साहन दिया गया है। पूर्व वर्षों और वर्तमान योजनाओं के तहत कुल 1.63 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में शेडनेट हाउस विकसित किए गए हैं। इससे किसान उच्च मूल्य वाली सब्जियों का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर बेहतर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

भंडारण सुविधाओं का हुआ विस्तार

उद्यानिकी फसलों के सुरक्षित भंडारण और मूल्य संवर्धन के लिए जिले में अब तक तीन कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि वर्ष 2025-26 में एक नए कोल्ड स्टोरेज का निर्माण भी कराया गया है। इसके अलावा 162.32 मीट्रिक टन क्षमता का एक राइपनिंग चेंबर और 18,800 मीट्रिक टन क्षमता वाले 376 प्याज भंडार गृह भी बनाए गए हैं।

सिंचाई सुविधाओं से किसानों को राहत

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 415 किसानों को ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर और पोर्टेबल सिंचाई संयंत्रों की स्थापना के लिए अनुदान सहायता प्रदान की गई है। इससे 408.80 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है। योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत तथा बड़े किसानों को 45 प्रतिशत तक अनुदान दिया गया है।

उद्यानिकी विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण सुविधाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के चलते नीमच जिले में उद्यानिकी और औषधीय फसलों की खेती आने वाले वर्षों में किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनेगी।

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