Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

बिहार में औषधीय खेती को बढ़ावा, 100 हेक्टेयर में एलोवेरा से शतावरी तक की खेती

03 अक्टूबर 2026, पटना: बिहार में औषधीय खेती को बढ़ावा, 100 हेक्टेयर में एलोवेरा से शतावरी तक की खेती – किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करने के लिए बिहार सरकार ने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के चयनित क्षेत्रों में 100 हेक्टेयर भूमि पर एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी की खेती कराई जाएगी। सरकार का जोर इन फसलों की क्लस्टर आधारित खेती पर रहेगा।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार योजना के लिए 36 लाख रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। पात्र किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 36 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ किसानों को खेती की वैज्ञानिक जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के साथ उत्पादों के विपणन में भी सहयोग देने की योजना है।

क्लस्टर में होगी खेती

सरकार औषधीय पौधों की खेती को छोटे-छोटे अलग-अलग खेतों तक सीमित रखने के बजाय क्लस्टर के रूप में विकसित करना चाहती है। एलोवेरा, अश्वगंधा और ब्राह्मी की खेती के लिए प्रत्येक राजस्व ग्राम या चयनित क्लस्टर में 5 हेक्टेयर क्षेत्र चिह्नित किया जाएगा। वहीं शतावरी की खेती के लिए प्रत्येक राजस्व ग्राम या क्लस्टर में 4 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया जाएगा।कुल 100 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए उपयुक्त क्षेत्रों और किसानों का चयन किया जाएगा। योजना में केवल खेती का रकबा बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile

फसल विविधीकरण से बढ़ेंगे विकल्प

बिहार में बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं। ऐसे में औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए एक नया विकल्प बन सकती है। एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी का उपयोग विभिन्न औषधीय और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों में किया जाता है। इनकी मांग को देखते हुए सरकार चयनित क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।

औषधीय खेती के विस्तार के साथ किसानों के सामने सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बाजार की निश्चित व्यवस्था की होगी। उत्पादन के साथ यदि गुणवत्ता वाले बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, तो फसल विविधीकरण की यह पहल किसानों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture