इंदौर संभाग में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा, 17.36 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य
25 अक्टूबर 2026, इंदौर: इंदौर संभाग में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा, 17.36 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य – मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को लेकर कृषि एवं संबंधित विभागों की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री के.सी. गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में खरीफ फसल वर्ष 2026 की समीक्षा के साथ रबी फसलों की बुवाई, खाद-बीज की उपलब्धता, कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में निर्देश दिए गए कि कम वर्षा से प्रभावित जिलों में किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों और कम अवधि में पकने वाली किस्मों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि इंदौर संभाग में रबी सीजन 2026-27 के दौरान कुल 17 लाख 36 हजार 5 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें गेहूं की बुवाई 9 लाख 93 हजार 100 हेक्टेयर और चने की बुवाई 5 लाख 82 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है। वहीं, मक्का की बुवाई के लिए 1 लाख 23 हजार 940 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इसके अलावा मसूर, मटर, सरसों, अलसी और गन्ने की बुवाई भी प्रस्तावित है।
कम बारिश वाले जिलों में फसल विविधीकरण पर जोर
बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026 में कम बारिश के कारण इंदौर संभाग के अलीराजपुर, धार, इंदौर और झाबुआ जिले प्रभावित हुए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में अलीराजपुर में 43.11 प्रतिशत, धार में 40.81 प्रतिशत, इंदौर में 32.82 प्रतिशत और झाबुआ में 28.98 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को परंपरागत फसलों के साथ अन्य विकल्पों की जानकारी भी दी जाए। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों और कम समय में पकने वाली किस्मों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके साथ ही उपलब्ध जल का उचित उपयोग करने, स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने तथा खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। चने और सरसों सहित अन्य फसलों का रकबा बढ़ाने के विषय पर भी चर्चा हुई।
किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री के.सी. गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रबी सीजन के दौरान किसानों को उनकी मांग के अनुसार समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि आदान उपलब्ध कराए जाएं। उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था, बीज की आवश्यकता, बीज प्रतिस्थापन दर और खाद, बीज व कीटनाशकों के नमूनों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा भी की गई।
अधिकारियों से खाद, बीज और कृषि औषधियों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया। अमानक खाद, बीज और औषधियों का क्रय-विक्रय या भंडारण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, जिन जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में उर्वरकों की उपलब्धता कम है, वहां प्राथमिकता से भंडारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव श्री निशांत वरवड़े ने निर्देश दिए कि अनुदानित उर्वरकों का वितरण केवल ई-विकास पोर्टल के माध्यम से किया जाए। उर्वरकों की बिक्री पीओएस मशीनों से सुनिश्चित करने और वितरण व्यवस्था का नियमित निरीक्षण एवं निगरानी करने को भी कहा गया। उर्वरक विक्रय केंद्रों पर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का पोर्टल पर दर्ज स्टॉक से आकस्मिक मिलान कराने और दोबारा उर्वरक लेने वाले किसानों का सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए।
फार्मर आईडी और उर्वरक वितरण व्यवस्था की होगी निगरानी
बैठक में फार्मर आईडी में किसानों के सभी खातों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। उर्वरक विक्रय केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए बैठने, छाया और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। किसान विश्राम शेड के निर्माण को प्राथमिकता देने और नए उर्वरक भंडारण केंद्र स्थापित करने के लिए सहकारिता के माध्यम से शासकीय भूमि आवंटन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में ई-विकास उर्वरक वितरण प्रणाली, एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति और प्रमुख शासकीय कृषि योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा कृषि अभियांत्रिकी योजनाओं, नरवाई प्रबंधन, शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में बीज उत्पादन एवं वितरण, मंडियों की नवीन योजनाओं और बीज निगम की देनदारियों पर चर्चा हुई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभागीय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए। कृषि क्षेत्र में हुए नवाचारों की जानकारी प्रस्तुत की गई और विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।
सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने पर जोर
सहकारिता आयुक्त श्री दीपक सिंह ने जिला सहकारी विकास समिति (DCDC) की हर महीने बैठक आयोजित करने और जिला स्तरीय क्रियान्वयन एवं निगरानी समिति (DLIMC) की नियमित बैठकें कराने के निर्देश दिए। वर्ष 2027-28 के फसल ऋणमान निर्धारण के लिए जिला स्तरीय तकनीकी समूह की बैठक आयोजित कर 15 नवंबर 2026 तक अनुशंसाएं भेजने को कहा गया।
किसानों के लिए फसल ऋण प्रक्रिया सरल बनाने और उनकी जरूरत के अनुसार वर्षभर नकद एवं वस्तु के रूप में ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के ऑनलाइन आवेदन और बैंक की शाखा स्तर पर ऋण स्वीकृति की सुविधा को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) में खाद की उपलब्धता, कालातीत ऋणों की वसूली और सहकारी संस्थाओं के कारोबार में वृद्धि एवं विविधीकरण जैसे विषयों की समीक्षा की गई।
उद्यानिकी और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की तैयारी
बैठक में उद्यानिकी विभाग की कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को सभी जिलों में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने के निर्देश दिए गए। उद्यानिकी से जुड़े किसानों को फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। साथ ही, पात्र किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव श्री निशांत वरवड़े, सहकारिता आयुक्त श्री दीपक सिंह, संभागायुक्त श्री भास्कर लाक्षाकार, विपणन संघ के प्रबंध संचालक श्री अभिजीत अग्रवाल, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के संचालक श्री उमाशंकर भार्गव और कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं मंडी आयुक्त श्री राघवेन्द्र सिंह उपस्थित रहे। इसके अलावा इंदौर कलेक्टर श्री शिवम वर्मा सहित संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित विभागों के संभागीय एवं जिला स्तरीय अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
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