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राज्य कृषि समाचार (State News)

बेंगलुरु के किसान कारिगौड़ा छोटी लौकी उगाकर कमा रहे महीने के 15 लाख रुपये, कतर तक जाती है उपज

25 अक्टूबर 2026, बेंगलुरु: बेंगलुरु के किसान कारिगौड़ा छोटी लौकी उगाकर कमा रहे महीने के 15 लाख रुपये, कतर तक जाती है उपज – कर्नाटक के बेंगलुरु में किसान कारिगौड़ा साढ़े तीन एकड़ जमीन पर बेबी बॉटल गार्ड यानी छोटी लौकी की खेती करते हैं, और उनकी ज्यादातर उपज सीधे खाड़ी देशों को निर्यात हो जाती है। व्यापारी उनके खेत से ही माल उठाकर कतर भेजते हैं।

कारिगौड़ा ‘स्वीकार 045 F1’ किस्म की लौकी उगाते हैं और खेत में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। बुवाई जून-जुलाई में होती है और करीब 70 दिन बाद कटाई शुरू हो जाती है।

रोजाना एक टन उपज

कटाई का सीजन करीब 90 दिन चलता है, और इस दौरान रोजाना लगभग एक हजार किलो लौकी निकलती है। खेत पर ही व्यापारी करीब 50 रुपये प्रति किलो की दर से माल खरीद लेते हैं, जिससे कारिगौड़ा को रोजाना करीब 50 हजार रुपये मिलते हैं। पूरे सीजन में यह कमाई लगभग 45 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, यानी औसतन हर महीने करीब 15 लाख रुपये।

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निर्यात के लिए लौकी का आकार और वजन बहुत अहम माना जाता है। आदर्श वजन लगभग 500 ग्राम रखा जाता है, क्योंकि देर से तोड़ने पर यह 800 ग्राम तक पहुंच जाती है और निर्यात मानकों के हिसाब से बड़ी हो जाती है। इसी वजह से हर दिन सटीक आकार पर ही कटाई की जाती है।

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निर्यात होने वाली सब्जियों में सही आकार, एकरूपता और ताजगी बनाए रखना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी वजह से ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे पौधों को नियमित पानी और पोषण मिलता रहे और उपज में एकरूपता बनी रहे।

बेंगलुरु और आसपास के इलाकों से सब्जियों का खाड़ी देशों को निर्यात कोई नई बात नहीं है, लेकिन बेबी बॉटल गार्ड जैसी खास किस्मों की मांग हाल के वर्षों में बढ़ी है। व्यापारी सीधे खेत से उपज उठाकर हवाई रास्ते से कुछ ही घंटों में इसे खाड़ी के बाजारों तक पहुंचा देते हैं, जिससे सब्जी की ताजगी बनी रहती है।

पारंपरिक सब्जियों की तुलना में निर्यात की मांग वाली फसलों में भाव ज्यादा स्थिर रहता है, क्योंकि व्यापारी पहले से करार करके खेत से माल उठाते हैं। इससे किसान को स्थानीय मंडी में भाव गिरने का जोखिम कम उठाना पड़ता है। हालांकि इस तरह की खेती में शुरुआती निवेश ज्यादा होता है, क्योंकि ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग शीट और बेहतर बीज की लागत सामान्य खेती से अधिक आती है। बेंगलुरु के आसपास सिंचाई के साधन और बाजार से नजदीकी के कारण ऐसी खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

बेबी बॉटल गार्ड जैसी छोटी किस्मों की मांग खाड़ी देशों के सुपरमार्केट और घरेलू बाजार दोनों में बढ़ी है, क्योंकि छोटे परिवारों के लिए यह आकार में सुविधाजनक रहती है। इसी वजह से बेंगलुरु, चिक्कबल्लापुर और उसके आसपास के इलाकों में कई किसान अब पारंपरिक सब्जियों के साथ-साथ निर्यात के लिए उपयुक्त किस्मों की भी खेती करने लगे हैं। कारिगौड़ा जैसे किसानों का अनुभव बताता है कि सही किस्म, तकनीक और समय पर कटाई का तालमेल बिठाकर कम जमीन में भी अच्छी कमाई की जा सकती है।

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