मध्यप्रदेश में दोगुना होगा मछली उत्पादन, 1 लाख केज कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
25 अक्टूबर 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में दोगुना होगा मछली उत्पादन, 1 लाख केज कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव – मध्यप्रदेश में मछली उत्पादन बढ़ाने और मत्स्य उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 लागू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में मछली उत्पादन को जल्द से जल्द दोगुना करना है। इसके तहत 1 लाख नए केज कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और निर्यात को बढ़ावा देकर प्रदेश को मत्स्य उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन-2026 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल के साथ सम्मेलन का शुभारंभ किया।
1 लाख नए केज कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मत्स्य उत्पादन को बढ़ाया जाएगा। प्रदेश में कई बड़े जलाशय हैं, जिनका उपयोग पेयजल, सिंचाई, पशुपालन, मछली उत्पादन और जल पर्यटन जैसे कार्यों के लिए किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि इन जल संसाधनों के माध्यम से किसानों और मछुआरों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाई जाए।
एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत प्रदेश में 1 लाख नए केज कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों और मछुआरों के हितों को ध्यान में रखते हुए बड़े तालाब विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जल संपदा को निवेश, नवाचार और निर्यात से जोड़कर मत्स्य उद्योग को आगे बढ़ाया जाएगा।
फूड प्रोसेसिंग और MSME से जुड़ेगा मत्स्य उद्योग
नई नीति के तहत मत्स्य पालन को फूड प्रोसेसिंग उद्योग से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। मछली के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और विपणन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा मत्स्य उद्योग को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) से जोड़कर निवेश और कारोबार के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों और मत्स्य उत्पादकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नीति के तहत भूमि आवंटन, तकनीकी सहायता और अन्य सुविधाओं के माध्यम से मत्स्य उद्योग में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने निवेशकों, निर्यातकों और स्टार्टअप से इस क्षेत्र की संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
49 जलाशयों में विकसित होंगी मत्स्य पालन सुविधाएं
सम्मेलन में मध्यप्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका-2026 और निर्यात पोर्टल की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि पहली बार निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से रायसेन जिले के बारना जलाशय में 500 केज कल्चर स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने मध्यप्रदेश के जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की योजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति भी हस्तांतरित की। प्रदेश के 49 जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए राशि की स्वीकृति दी गई है।
अगले 3 साल में 10 लाख टन मछली उत्पादन का लक्ष्य
प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में लगभग 4.45 लाख टन मछली उत्पादन हो रहा है। अगले 3 वर्षों में इसे बढ़ाकर 10 लाख टन करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में हर साल 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और इसके माध्यम से 50 हजार रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से निवेशकों को सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 69 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं से जल संरचनाओं का विकास होगा, जिससे मत्स्य उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
उन्होंने जल संरक्षण के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत 10 हजार करोड़ रुपये के जल संरक्षण कार्य किए गए हैं। पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन के साथ नए जलाशयों और अमृत सरोवरों का विकास भी किया जा रहा है। इन प्रयासों से जल संसाधनों के संरक्षण और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
भारत के मछली उत्पादन में 106 प्रतिशत की वृद्धि
केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत मछली उत्पादन के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2014 में देश का मछली उत्पादन 95.7 लाख टन था, जो 11 वर्षों में 106 प्रतिशत बढ़कर 198 लाख टन हो गया है। उन्होंने बताया कि देश से मत्स्य उत्पादों का निर्यात 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और भारतीय मत्स्य उत्पाद 130 देशों में भेजे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अंतर्देशीय राज्यों में मत्स्य उत्पादन में 147 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मध्यप्रदेश की नई मत्स्योद्योग नीति से इस क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, फूलों की खेती, औषधीय पौधों और जैविक खेती जैसी गतिविधियों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंदिरा सागर में 1 लाख केज कल्चर स्थापित करने की दिशा में काम एक उदाहरण बन सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को मत्स्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।
एकीकृत मॉडल से बढ़ेंगे निवेश के अवसर
प्रदेश के मत्स्य पालन मंत्री नारायण सिंह पंवार ने कहा कि नई नीति से मछुआरों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। आधुनिक केज कल्चर तकनीक से मत्स्य उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और आने वाले वर्षों में यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। भारत सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि मत्स्य पालन देश में करीब 6 करोड़ लोगों की आजीविका से जुड़ा है। यह खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के साथ समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने मध्यप्रदेश को मत्स्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावनाओं वाला राज्य बताया।
प्रदेश के मत्स्य विभाग के सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं और इंदिरा सागर जैसे बड़े जलाशय मत्स्य पालन के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण हैं। नई नीति में एकीकृत मत्स्य पालन मॉडल के तहत मछली पालन के साथ एक्वापोनिक्स, मोती पालन और बत्तख पालन जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। निवेशकों की सुविधा के लिए एकल पोर्टल की व्यवस्था की गई है।
निवेशकों और निर्यातकों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन में देश-विदेश के मत्स्य निर्यातकों, खरीदारों, विक्रेताओं और मछली उत्पादक किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान निवेश बढ़ाने, कारोबार के विस्तार और मत्स्य उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा के लिए खरीदार-विक्रेता बैठक भी आयोजित की गई। सम्मेलन में कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता, भारत सरकार के मत्स्य विभाग की संयुक्त सचिव गुंजन कृष्णा सहित अन्य अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कोच्चि और मुंबई के MPEDA अधिकारियों के साथ मालपुरी एकबा प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड, वी.के. एंटरप्राइजेज, समीमी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड और नीलेश सी फूड्स के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
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