राजस्थान: उर्वरक वितरण में एफएफएस व्यवस्था का असर, बूंदी में 52 हजार से ज्यादा किसानों को मिला खाद
17 सितंबर 2026, जयपुर: राजस्थान: उर्वरक वितरण में एफएफएस व्यवस्था का असर, बूंदी में 52 हजार से ज्यादा किसानों को मिला खाद – राजस्थान मे उर्वरक वितरण को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए लागू की गई फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स (एफएफएस) व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। व्यवस्था लागू होने के बाद जिले में अब तक 52,293 किसानों को कुल 10,117.68 मीट्रिक टन अनुदानित उर्वरक का वितरण किया जा चुका है।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि एफएफएस के माध्यम से किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा दी जा रही है। बुकिंग के बाद प्राप्त टोकन या क्यूआर कोड के जरिए किसान निर्धारित अधिकृत विक्रेता से उर्वरक प्राप्त कर रहे हैं। इससे वितरण में पारदर्शिता के साथ स्टॉक की निगरानी भी प्रभावी तरीके से की जा रही है।
नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई
कृषि विभाग द्वारा एफएफएस व्यवस्था के पालन को लेकर सख्ती बरती जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने पर एफसीओ 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत 13 उर्वरक खुदरा विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि 23 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने विक्रेताओं को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और किसानों को नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उर्वरक की उपलब्धता, स्टॉक और वितरण प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जा रही है।
185 ग्राम पंचायतों में जागरूकता अभियान
किसानों को एफएफएस प्रणाली और ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए जिले की 185 ग्राम पंचायतों में 14 सितंबर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में किसानों को एफएफएस एप डाउनलोड करने, लॉगिन करने, भूमि और फसल का विवरण दर्ज करने, उर्वरक का चयन करने तथा ऑनलाइन बुकिंग के बाद टोकन या क्यूआर कोड के जरिए उर्वरक प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।
अब तक 172 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 8,116 किसानों ने भाग लिया। कृषि विभाग के कर्मचारियों द्वारा किसानों को एफएफएस के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देने के साथ उनकी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान भी किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, एफएफएस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उर्वरक की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया से डिजिटल रूप से जोड़ना तथा अनुदानित उर्वरक वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
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