श्रीगंगानगर: किसानों को गुलाबी सुंडी और फसल रोगों से बचाव की वैज्ञानिक जानकारी दी
17 सितंबर 2026, श्रीगंगानगर: श्रीगंगानगर: किसानों को गुलाबी सुंडी और फसल रोगों से बचाव की वैज्ञानिक जानकारी दी – टिड्डी-सह-एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, श्रीगंगानगर की ओर से 15 और 16 सितंबर 2026 को गांव मन्नीवाली, ब्लॉक सादुलशहर में किसानों के लिए दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किसानों को फसल सुरक्षा, कीट एवं रोग प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों की वैज्ञानिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन उप निदेशक (खरपतवार विज्ञान) डॉ. आर. के. शर्मा ने किया। उन्होंने समेकित नाशीजीव प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए फसल सुरक्षा के लिए रासायनिक उपायों के साथ जैविक, यांत्रिक और अन्य वैज्ञानिक विधियों को अपनाने की बात कही। उन्होंने नियमित फसल निगरानी को प्रभावी नाशीजीव प्रबंधन की आधारभूत आवश्यकता बताया।
गुलाबी सुंडी की पहचान और प्रबंधन की जानकारी
सहायक निदेशक प्रकाश चंद्र ने कपास की फसल में गुलाबी सुंडी की समस्या, उसकी पहचान और प्रभावी प्रबंधन उपायों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को समय रहते फसल की निगरानी कर अनुशंसित तकनीकों से गुलाबी सुंडी के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए जागरूक किया। सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी (कीट विज्ञान) जितेंद्र मीणा ने विभिन्न फसलों में पाए जाने वाले प्रमुख हानिकारक कीटों की पहचान, निगरानी और प्रबंधन की जानकारी दी। सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी करीना बैफलावत ने खरीफ फसलों में होने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके शुरुआती लक्षणों और रोकथाम एवं प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों के बारे में किसानों को बताया।
मिट्टी के पीएच और ट्राइकोडर्मा के उपयोग पर जानकारी
वैज्ञानिक सहायक आर. के. चौधरी ने राष्ट्रीय कीट सर्वेक्षण प्रणाली की उपयोगिता समझाई। साथ ही किसानों को मिट्टी के पीएच की जांच के सरल तरीकों और फसल उत्पादन में उचित पीएच प्रबंधन के महत्व की जानकारी दी। वैज्ञानिक सहायक वर्षा ने ट्राइकोडर्मा के उपयोग एवं महत्व के बारे में बताते हुए मृदा जनित रोगों के प्रबंधन में इसकी भूमिका समझाई। उन्होंने फसलों में लाभकारी कीटों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में रिया चावला, राज्य सरकार की ओर से सहायक कृषि अधिकारी इंद्राज, कृषि पर्यवेक्षक कुलदीप और प्रवीण कुमार तथा अंबुजा फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को फसल सुरक्षा में जैविक उपायों के महत्व के साथ समेकित नाशीजीव प्रबंधन, गुलाबी सुंडी, खरीफ फसलों के रोग, कीट निगरानी, राष्ट्रीय कीट सर्वेक्षण प्रणाली, मिट्टी के पीएच प्रबंधन और लाभकारी कीटों के संरक्षण से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई। समापन अवसर पर किसानों को एक-एक पैकेट ट्राइकोडर्मा वितरित किया गया, ताकि वे इसका उपयोग खेतों में मृदा जनित रोगों के प्रबंधन के लिए कर सकें।
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