राज्य कृषि समाचार (State News)

जनेकृविवि: सोयाबीन में फलियां कम और दाना भराव कमजोर हो तो अपनाएं ये उपाय

17 सितंबर 2026, भोपाल: जनेकृविवि: सोयाबीन में फलियां कम और दाना भराव कमजोर हो तो अपनाएं ये उपाय – वर्तमान समय में सोयाबीन की फसल फूल, फली निर्माण और दाना भराव की महत्वपूर्ण अवस्था में है। कई क्षेत्रों में किसानों द्वारा फूल एवं छोटी फलियों के झड़ने, कम फलियां बनने और फलियों में दानों का सही भराव नहीं होने जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। इसके कारण जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों के हित में महत्वपूर्ण सलाह दी है। वैज्ञानिकों डॉ. आराधना कुमारी एवं डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी, विभागाध्यक्ष, पादप कार्यिकी विभाग के अनुसार अत्यधिक वर्षा अथवा सूखे की स्थिति, तापमान में उतार-चढ़ाव, पोषक तत्वों की कमी तथा पौधों पर शारीरिक तनाव के कारण फूल एवं फलियों का झड़ना बढ़ सकता है और दाना भराव प्रभावित हो सकता है।

फूल और छोटी फलियों के झड़ने पर NAA का छिड़काव

फूल एवं छोटी फलियों का झड़ना कम करने तथा फली धारण में सुधार के लिए उपयुक्त अवस्था में NAA 20–40 ppm का पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है। प्रतिकूल मौसम एवं नमी के तनाव की स्थिति में थायोयूरिया 750 ppm (0.75 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव पौधों की शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

फली और दाना भरने के समय पोषण का रखें ध्यान

फली बनने एवं दाना भरने के समय पौधों को पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। आवश्यकता के अनुसार पानी में घुलनशील NPK 19:19:19 अथवा 17:44:00 @ 0.5 प्रतिशत (5 ग्राम/लीटर पानी) का पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है। बोरॉन एवं जिंक फूल, परागण, प्रजनन वृद्धि और विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी कमी वाले खेतों में मिट्टी अथवा पौध परीक्षण और स्थानीय अनुशंसा के आधार पर इन सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग किया जाना चाहिए। दाना भराव के समय पोटैशियम पौधे में प्रकाश संश्लेषित पदार्थों के स्थानांतरण तथा जल संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नमी के तनाव की स्थिति में आवश्यकता के अनुसार KNO₃ @ 1 प्रतिशत (10 ग्राम/लीटर पानी) का पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है।

हरी और स्वस्थ पत्तियों को बनाए रखें

इस अवस्था में पौधों की हरी एवं स्वस्थ पत्तियों को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखना विशेष रूप से आवश्यक है, क्योंकि पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण से बने पदार्थ ही विकसित हो रही फलियों और दानों तक पहुंचते हैं। इसलिए कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करें तथा आवश्यकता होने पर अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाएं। फली निर्माण से लेकर दाना भराव तक खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव बिल्कुल न होने दें। अधिक पानी होने पर खेत से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करें। वहीं, लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर उपलब्धता के अनुसार जीवनरक्षक सिंचाई करें।

रसायनों के प्रयोग में सावधानी जरूरी

पौध वृद्धि नियामक (PGR), सूक्ष्म पोषक तत्वों और उर्वरकों की अधिक मात्रा लाभ के बजाय फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। विभिन्न रसायनों को उनकी अनुकूलता की जानकारी के बिना एक ही टंकी में मिलाकर छिड़काव न करें। व्यावसायिक PGR की मात्रा उसमें मौजूद सक्रिय तत्व की सांद्रता तथा उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा के अनुसार ही निर्धारित करें।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture