राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान: खाद-बीज कारोबारियों पर कृषि विभाग की सख्ती, 17 विक्रेताओं को थमाए नोटिस  

06 जून 2026, जयपुर: राजस्थान: खाद-बीज कारोबारियों पर कृषि विभाग की सख्ती, 17 विक्रेताओं को थमाए नोटिस – किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद, बीज एवं कीटनाशी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा झालावाड़ जिले में राजस्थान सघन गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत कृषि आदान विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों एवं गोदामों का निरीक्षण कर खाद, बीज एवं कीटनाशियों के नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं। इन नमूनों को जांच हेतु अधिसूचित राज्य प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। जांच में नमूने अमानक पाए जाने पर संबंधित विक्रेता एवं विपणनकर्ताओं के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि अभियान के दौरान प्रतिष्ठानों पर स्टॉक एवं मूल्य सूची का प्रदर्शन, स्टॉक रजिस्टर का संधारण, किसानों को पक्का बिल जारी करना, अधिकृत गोदामों में उर्वरकों का भंडारण तथा विभाग में दर्ज ‘‘ओ’’ फॉर्म अथवा पीसी वाले बीज, उर्वरक एवं कीटनाशियों का ही व्यापार किए जाने की जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन, लाइसेंस निरस्तीकरण एवं सामग्री जब्ती जैसी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

पनवाड़ क्षेत्र में 17 आदान विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस

अभियान के अंतर्गत संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) द्वारा 3 जून 2026 को पनवाड़ क्षेत्र के कृषि आदान विक्रेताओं का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान देव पेस्टीसाइड्स, श्रीजी पेस्टीसाइड्स, लक्ष्मी एंटरप्राइजेज, मेहता ट्रेडर्स, बालाजी ट्रेडर्स, श्री गिरिराज धरण एंटरप्राइजेज, श्री सांवरिया ट्रेडर्स, श्री कृष्णा एंटरप्राइजेज, बालाजी कृषि सेवा केन्द्र, तनिष्का ट्रेडिंग कम्पनी, हाड़ौती कृषि सेवा केन्द्र, महादेव कृषि सेवा केन्द्र, अंकित ट्रेडर्स, कल्याण राय बीज भण्डार, धरणीधर कृषि बाजार, बीटूके एग्रीमार्ट एवं विजय एग्री क्लीनिक के संचालक दुकानें बंद कर अनुपस्थित पाए गए। इन सभी 17 आदान विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं तथा उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है।

जिले से बाहर उर्वरक बेचने पर दर्ज होगी एफआईआर

जिले के किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को जिले से बाहर उर्वरकों का विक्रय नहीं करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई विक्रेता जिले से बाहर उर्वरकों का विक्रय करता पाया गया तो उसके विरुद्ध उर्वरक मूवमेंट आदेश, 1973 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।

जिले में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है उर्वरक

कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में 26,032 मैट्रिक टन यूरिया, 3,564 मैट्रिक टन डीएपी, 31,556 मैट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 5,583 मैट्रिक टन एनपीके उर्वरक उपलब्ध हैं। जिले में उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति जारी है तथा विभाग द्वारा नियमित मॉनिटरिंग कर सभी क्षेत्रों में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

संतुलित उर्वरक उपयोग से बढ़ेगी उत्पादकता, सुधरेगी मृदा गुणवत्ता

डॉ. शर्मा ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि बिना मृदा परीक्षण के अंधाधुंध उर्वरक प्रयोग से उत्पादन लागत बढ़ती है, उर्वरकों की दक्षता घटती है तथा मृदा एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जिंक, कॉपर एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी प्रभावित होती है।

तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए एसएसपी और यूरिया का मिश्रण बेहतर विकल्

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) ने बताया कि तिलहनी एवं दलहनी फसलों में डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के एक बैग की तुलना में तीन बैग सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) एवं एक बैग यूरिया का मिश्रण अधिक लाभकारी सिद्ध होता है। यह मिश्रण 12 किलोग्राम अतिरिक्त नाइट्रोजन, 16.5 किलोग्राम सल्फर, 0.75 किलोग्राम जिंक तथा 27 से 32 किलोग्राम अतिरिक्त कैल्शियम उपलब्ध कराता है। साथ ही इसमें मौजूद कैल्शियम मृदा सुधारक के रूप में भी कार्य करता है।

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