रायपुर: खरीफ सीजन से पहले किसानों को बड़ी सौगात, ICAR-NIBSM ने 170 से अधिक किसानों को बांटे उन्नत धान बीज
10 जून 2026, रायपुर: रायपुर: खरीफ सीजन से पहले किसानों को बड़ी सौगात, ICAR-NIBSM ने 170 से अधिक किसानों को बांटे उन्नत धान बीज – आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) के अंतर्गत धान बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत पचेड़ा, बेलटुकरी और बिठिया गांवों के 170 से अधिक किसानों को उन्नत धान बीज वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य किसानों के बीच उन्नत धान किस्मों और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादकता एवं आय में वृद्धि करना है।
किसानों को दी गई उन्नत धान किस्मों की जानकारी
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किसानों को संबोधित करते हुए सतत कृषि उत्पादन के लिए उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फसल की आवश्यकता और मृदा स्वास्थ्य के अनुसार पोषक तत्वों का उचित प्रबंधन उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करता है। उन्होंने आगामी खरीफ सीजन के लिए किसानों को प्रभावी पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
दो उन्नत धान किस्मों के बीज किए गए वितरित
कार्यक्रम के दौरान किसानों को धान की दो उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध कराए गए।
1. विक्रम टीसीआर (Vikram TCR): यह उच्च उत्पादकता वाली किस्म 120 से 130 दिनों में पकती है और इसकी उत्पादन क्षमता 60 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है।
2. सीजी देवभोग (CG Devbhog): यह 135 से 140 दिनों में पकने वाली मध्यम अवधि की सुगंधित धान किस्म है, जिसकी औसत उत्पादन क्षमता 35 से 37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। अपनी विशिष्ट सुगंध और बेहतर दाना गुणवत्ता के कारण यह बाजार में काफी लोकप्रिय मानी जाती है।
वैज्ञानिक खेती और फसल प्रबंधन की दी जानकारी
संस्थान के संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से धान की नर्सरी तैयार करने और रोपाई की उन्नत विधियों की जानकारी दी। उन्होंने कीट एवं रोग प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकें अपनाने के लिए प्रेरित किया।
हरित खाद के महत्व से कराया अवगत
बीज वितरण कार्यक्रम से पहले किसानों ने संस्थान के प्रायोगिक खेत का भ्रमण किया। यहां उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग में संचालित हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के प्रदर्शन को दिखाया गया।
इस अवसर पर डॉ. योगेश येले और डॉ. संदीप अडावी ने हरित खाद के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि यह मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने, पोषक तत्वों की उपलब्धता सुधारने और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि हरित खाद का उपयोग संस्थान के “खेत बचाओ अभियान” का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के माध्यम से मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण और संवर्धन करना है।
किसानों ने जताया आभार
लाभार्थी किसानों ने गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता और संस्थान द्वारा दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। किसानों ने विश्वास जताया कि उन्नत धान किस्मों और वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से उन्हें उत्पादन बढ़ाने और अपनी आय मजबूत करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. के.सी. शर्मा, नोडल अधिकारी द्वारा किया गया। इस दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
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