राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश के बांध लबालब, सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त जल: मंत्री तुलसीराम सिलावट

12 सितम्बर 2024, भोपाल: मध्यप्रदेश के बांध लबालब, सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त जल: मंत्री तुलसीराम सिलावट – इस साल अच्छी बारिश के कारण मध्यप्रदेश के ज्यादातर बांध लबालब भर चुके हैं। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि प्रदेश के प्रमुख बांधों में जलभराव की स्थिति 87 प्रतिशत से अधिक है, जिससे सिंचाई, पेयजल और विद्युत उत्पादन के लिए राज्य को पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा।

मंत्री ने बताया कि राज्य के 282 चिन्हित बांधों में से 199 बांधों में जलभराव 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। इसके अलावा, मानसून 2024 में प्रदेश में अब तक औसतन 929.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो राज्य की औसत वर्षा से 9 प्रतिशत अधिक है। इस वर्ष, प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में भी औसत से अधिक बारिश हुई है, जिससे बांधों में जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विगत वर्ष आज की स्थिति में मध्यप्रदेश में वास्तविक वर्षा 738.9 मि.मी. दर्ज हुई थी, जो कि औसत वर्षा से 14 प्रतिशत कम थी। 

नर्मदा बेसिन के बांधों में जलभराव की स्थिति

नर्मदा बेसिन के प्रमुख बांध, जैसे जबलपुर का बरगी (101.52%), रायसेन का बारना (94.34%), नर्मदापुरम का तवा (97.50%), सीहोर का कोलार (99.33%), खंडवा का इंदिरा सागर (93.25%) और ओंकारेश्वर (59%) जलभराव की स्थिति में हैं। इन बांधों से प्रदेश को सिंचाई और जल आपूर्ति के साथ-साथ बिजली उत्पादन में भी राहत मिलेगी।

अन्य बेसिनों की स्थिति

वैनगंगा बेसिन के प्रमुख बांधों जैसे पेंच छिंदवाड़ा (96.91%), संजय सरोवर सिवनी (97.97%), और बालाघाट का राजीव सागर (97.23%) में भी लगभग पूरी क्षमता से जलभराव है। इसी तरह गंगा बेसिन में शहडोल स्थित बाणसागर (94.55%) और सीधी स्थित महान बांध (90.66%) में भी भरपूर जल भंडारण हुआ है।

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बेतवा बेसिन के प्रमुख बांध, जैसे भोपाल के केरवा और कलियासोत बांध, लगभग 98 प्रतिशत से अधिक जलभराव की स्थिति में हैं। चंबल बेसिन में गांधी सागर बांध (87.78%) और मोहनपुरा (93.45%) में भी पर्याप्त जल उपलब्ध है।

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संभावित बाढ़ से बचाव के उपाय

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में आईएमडी द्वारा जारी वर्षा के पूर्वानुमान और पानी की आवक को ध्यान में रखते हुए बांधों के गेटों का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत बांधों के खुलने और बंद होने की योजना तैयार की गई है ताकि किसी भी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति न बने।

प्रदेश की अच्छी मानसून गतिविधियों ने राज्य के जलाशयों को समृद्ध किया है, जिससे आगामी समय में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए प्रदेश को पर्याप्त जल मिलता रहेगा।

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