Ad DesktopAd TabletAd Mobile
किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)राज्य कृषि समाचार (State News)

गर्म इलाके में ठंडे प्रदेश की फसल स्ट्रॉबेरी का लिया उत्पादन

13 अप्रैल 2024, इंदौर: गर्म इलाके में ठंडे प्रदेश की फसल स्ट्रॉबेरी का लिया उत्पादन – असली सफलता वही है ,जो विषमताओं के बीच संघर्षों से हासिल की जाए। गर्म इलाके में ठंडे प्रदेश की फसल स्ट्रॉबेरी का उत्पादन लेने की चुनौती में सफल होने वाले  ग्राम जोतपुर के प्रगतिशील कृषक श्री शिवचंद पाटीदार ने इस क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी उत्पादन की संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। श्री पाटीदार को इस पहल के लिए ‘ प्रगतिशील कृषि अवार्ड ‘ से सम्मानित किया गया है।

गर्म इलाके में ठंडे प्रदेश की फसल – निमाड़ से सटे धार जिले के मनावर से 15 किमी दूर स्थित ग्राम जोतपुर को गर्म इलाका माना जाता है। यहाँ के निवासी कला स्नातक युवा प्रगतिशील कृषक श्री शिवचंद पाटीदार ने कृषक जगत को बताया कि उनके पास कुल 28 बीघा ज़मीन है, जिस पर परंपरागत खेती के तहत मक्का, कपास , सब्जियां और डॉलर चना उगाते हैं। नूतन प्रयोगधर्मी श्री पाटीदार ने सोशल मीडिया और नेट की मदद से स्ट्रॉबेरी की खेती से संबंधित जानकारी हासिल की और निमाड़ जैसे गर्म इलाके में ठंडे प्रदेश की फसल स्ट्रॉबेरी का उत्पादन लेने की ठानी। अक्टूबर 2023  में हिमाचल प्रदेश से स्ट्रॉबेरी की किस्म विंटर डान के पौधे परिवहन खर्च सहित 11 रु प्रति नग की दर से बुलाए और 30 हज़ार पौधे मल्चिंग डालकर लगाए। एक बीघा में करीब 7800 पौधे लगते हैं।

 श्री शिवचंद पाटीदार

लगाने का तरीका – श्री पाटीदार ने कहा कि अक्टूबर में ज़मीन की जुताई कर बेड बनाए और बेसल डोज़ में एक बीघा में 50  किलो डीएपी, कैल्शियम , मैग्निशियम ह्यूमिक के अलावा 15 -20  किलो /बीघा के दर से सूक्ष्म पोषक तत्व डालकर मल्चिंग बिछाई ,ताकि नमी बनी रहे और खरपतवार न उगे। मल्चिंग से मिट्टी में ठंडक के अलावा पौधे को पोषक तत्व सही मात्रा में मिलता है और कीटों से भी सुरक्षा मिलती है। स्ट्रॉबेरी के पौधे एक बेड पर दो कतार में लगाते हैं , जिसमें कतार से कतार की दूरी 12  इंच और पौधे से पौधे की दूरी 12 -16  इंच रखी जाती है। स्ट्रॉबेरी विदेशी फसल होने से इसका पौधा संवेदनशील रहता है , इसलिए फंगीसाइड का प्रयोग करना पड़ता है।  इस फसल में इल्ली और  थ्रिप्स आती है, जिनके अलावा  फंगस का भी ध्यान रखना पड़ता है। पौधे के विकास के लिए सीमित मात्रा में उर्वरक ड्रिप से दिया जाता है। पौधों की मांग अनुसार सिंचाई नियमित रूप से करनी पड़ती है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

अनुकूल समय – स्ट्रॉबेरी की फसल के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय अनुकूल रहता है। पौधे लगाने के 30  दिन के बाद फूल आना शुरू हो जाते हैं और 40  दिन के बाद फल परिपक्व होना शुरू हो जाते हैं। इन्हें पहली बार लगाने पर स्ट्रॉबेरी का प्रति पौधा एक से डेढ़ किलो का उत्पादन मिला। स्ट्रॉबेरी की एक ट्रे में 8 बॉक्स होते हैं , जिसका गत वर्ष भाव कम होने से अधिकतम 150 और न्यूनतम 120 रु कीमत मिली । एक बीघे से खर्च सहित करीब ढाई लाख रु मिले। श्री पाटीदार  इस वर्ष स्ट्रॉबेरी के पौधों की नर्सरी खुद ही तैयार करेंगे। इसके लिए इजिप्ट और कैलिफोर्निया से ऑनलाइन ट्रेनिंग ली है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

सम्मान –  श्री शिवचंद पाटीदार को निमाड़ जैसे गर्म इलाके में ठंडे क्षेत्र की फसल स्ट्रॉबेरी का उत्पादन लेने के नवाचार के लिए गत फरवरी में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर द्वारा ‘प्रगतिशील कृषि अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था।  संपर्क नंबर – 9165847272

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प)