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राज्य कृषि समाचार (State News)

प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा, खरगोन में स्थापित होंगे 10 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर

27 अगस्त 2026, खरगोन: प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा, खरगोन में स्थापित होंगे 10 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर – मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 10 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) स्थापित किए जाएंगे। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत बनाए जाने वाले इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी जैव-इनपुट स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

उप संचालक कृषि शिव सिंह राजपूत ने बताया कि जिले में 15 प्राकृतिक खेती क्लस्टर गठित किए गए हैं। प्रत्येक दो क्लस्टर पर एक बीआरसी स्थापित किया जाएगा। बीआरसी की स्थापना के लिए स्थानीय कृषि उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों और प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक आवेदक 10 सितंबर 2026 को शाम 6 बजे तक संबंधित विकासखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम) अथवा परियोजना संचालक आत्मा कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं।

इन विकासखंडों में स्थापित होंगे बीआरसी

जिले में खरगोन विकासखंड में 2 तथा सेंगाव, गोगावां, भीकनगांव, भगवानपुरा, झिरन्या, कसरावद, महेश्वर और बड़वाह में एक-एक बीआरसी स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों से किसानों को प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाली जैविक सामग्री स्थानीय स्तर पर समय पर उपलब्ध हो सकेगी।

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आवेदन के साथ देने होंगे ये दस्तावेज

आवेदकों को संस्था का पंजीयन प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, सदस्यों की सूची और कम से कम दो वर्ष की विस्तृत प्राकृतिक खेती व्यवसाय योजना प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। बिजनेस प्लान में केंद्र का प्रस्तावित स्थान, क्षेत्र की कृषि स्थिति, सेवा क्षेत्र का बाजार विश्लेषण, जागरूकता एवं विपणन रणनीति, जैव-इनपुट उत्पादन एवं विक्रय योजना तथा कच्चे माल की उपलब्धता और सोर्सिंग का विवरण देना होगा।

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बीआरसी संचालन के लिए पशुधन या पौधों पर आधारित बायोमास जैसे आवश्यक कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता भी जरूरी होगी। यदि गोबर और गौमूत्र की व्यवस्था स्वयं के माध्यम से नहीं है, तो पांच किलोमीटर की परिधि में स्थित गौशालाओं से इसकी उपलब्धता का विवरण आवेदन में देना होगा। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह, एफपीओ, प्राथमिक सेवा सहकारी समिति, गौशाला, ग्राम पंचायत या अन्य सामुदायिक संस्थाओं से सहयोग की जानकारी भी देनी होगी।

कृषि विभाग के अनुसार पात्र संस्थाओं के अभाव में संबंधित क्लस्टर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती से जुड़े कृषि उद्यमियों का चयन किया जाएगा। जिले में बीआरसी स्थापित होने से किसानों को जैव-इनपुट आसानी से उपलब्ध होंगे और प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

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