राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत-सेशेल्स समुद्री सहयोग बढ़ाएंगे, मछली पालन से ब्लू इकोनॉमी तक साथ काम करने पर जोर

27 अगस्त 2026, नई दिल्ली: भारत-सेशेल्स समुद्री सहयोग बढ़ाएंगे, मछली पालन से ब्लू इकोनॉमी तक साथ काम करने पर जोर – भारत और सेशेल्स ने समुद्री संसाधनों के बेहतर और टिकाऊ इस्तेमाल के साथ मछली पालन, जलीय कृषि और ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए आपसी सहयोग और मजबूत करने पर सहमति जताई है। इस संबंध में नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में समुद्री क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सेशेल्स के मत्स्य, कृषि एवं ब्लू इकोनॉमी मंत्री वॉलेस कॉसग्रो ने अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। भारत की ओर से मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बैठक में हिस्सा लिया। दोनों पक्षों ने समुद्री संसाधनों के संरक्षण के साथ उनके आर्थिक उपयोग के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

मछली पालन से रोजगार और खाद्य सुरक्षा

बैठक में दोनों देशों ने माना कि मत्स्य क्षेत्र केवल व्यापार और आर्थिक गतिविधि का माध्यम नहीं है, बल्कि रोजगार, आजीविका और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेष रूप से तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार मछली पालन तथा इससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर हैं।

भारत ने बैठक के दौरान अपने मत्स्य क्षेत्र की प्रगति और उपलब्धियों को भी साझा किया। देश में मछली उत्पादन बढ़कर करीब 197 लाख टन यानी 19.7 मिलियन टन तक पहुंच गया है। वहीं समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात करीब 8.46 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत के अनुभव और तकनीकी क्षमता से सेशेल्स को भी अपने मत्स्य क्षेत्र के विकास में मदद मिलने की संभावना है।

टूना फिशरीज और समुद्री जलीय कृषि पर जोर

दोनों देशों ने समुद्र में मछली पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर भी चर्चा की। इनमें मरीन एक्वाकल्चर, आधुनिक हैचरी तकनीक और टूना फिशरीज जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे। समुद्री जलीय कृषि के माध्यम से मछली और अन्य जलीय जीवों का नियंत्रित एवं वैज्ञानिक तरीके से पालन बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इसके अलावा मछली भंडार का वैज्ञानिक आकलन, मछली पकड़ने के बाद उसके सुरक्षित रखरखाव और बेहतर प्रसंस्करण तकनीकों को विकसित करने पर भी सहयोग की संभावनाएं तलाशी गईं।

दोनों देशों के बीच सहयोग का व्यापक उद्देश्य समुद्री संसाधनों का ऐसा उपयोग सुनिश्चित करना है, जिससे आज की आर्थिक जरूरतें पूरी होने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए समुद्री पारिस्थितिकी और संसाधनों का संतुलन भी कायम रहे। इससे मत्स्य क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होने के साथ भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री साझेदारी को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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