नाबार्ड का स्टेट फोकस पेपर 2026-27 जारी
मध्य प्रदेश में रु.3.75 लाख करोड़ की क्रेडिट क्षमता, कृषि और MSME पर सबसे ज़्यादा ज़ोर
30 जनवरी 2026, भोपाल: नाबार्ड का स्टेट फोकस पेपर 2026-27 जारी – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने मध्य प्रदेश के लिए स्टेट फोकस पेपर (SFP) 2026-27 पेश किया है। इसमें राज्य के लिए रु. 3.75 लाख करोड़ से अधिक की प्राथमिकता क्षेत्र क्रेडिट क्षमता का अनुमान लगाया गया है। यह दस्तावेज़ कृषि, MSME और ग्रामीण विकास की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस अवसर पर मिंटो हॉल, भोपाल में आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार में सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, कृषि मंत्री श्री आदल सिंह कंसाना, नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती, RBI की रीजनल डायरेक्टर सुश्री रेखा चंदनवेली, SLBC संयोजक श्री धीरज गोयल, राज्य सहकारी बैंक के एमडी श्री मनोज गुप्ता सहित वरिष्ठ बैंकर और सरकारी अधिकारी मौजूद रहे।
कृषि और MSME को सबसे ज़्यादा ऋण
स्टेट फोकस पेपर के अनुसार,
• कृषि क्षेत्र के लिए रु. 2.08 लाख करोड़
• MSME क्षेत्र के लिए रु. 1.46 लाख करोड़
• शेष रु. 20,371 करोड़ निर्यात, शिक्षा, आवास, सामाजिक ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए अनुमानित हैं।
नाबार्ड के अनुसार, मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका प्रमुख है, जो राज्य के GSDP में 44.36% का योगदान देती है। इसी कारण कृषि ऋण क्षमता को प्राथमिकता दी गई है। इसमें
• फसल ऋण: रु. 1.79 लाख करोड़
• कृषि बुनियादी ढांचा: रु. 6,461 करोड़
• पशुपालन व अन्य सहायक गतिविधियां: रु. 22,692 करोड़ शामिल हैं।
राज्य गेहूं, चावल, सोयाबीन, चना, दालों और तिलहन के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में है, जिससे कृषि ऋण की मांग लगातार बनी हुई है।
राज्य की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग स्थिति
नाबार्ड के अनुसार,
• वर्ष 2024-25 में राज्य का GSDP रु. 15.03 लाख करोड़ रहा
• विकास दर 6.05%
• प्रति व्यक्ति आय रु. 1.52 लाख
• राज्य में 8,779 बैंक शाखाएं और 8,882 ATM हैं
• मार्च 2025 तक क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 83.51% रहा
ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य की बैंकिंग व्यवस्था भविष्य की बढ़ती ऋण जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
ग्रामीण विकास में नाबार्ड की बड़ी भूमिका
नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती ने बताया कि
• 2024-25 में रु. 27,331 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई
• रु. 4,132 करोड़ RIDF के तहत ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए
• रु. 23,199 करोड़ ग्रामीण वित्तीय संस्थानों को पुनर्वित्त के रूप में
इसके अलावा,
• 90 वाटरशेड परियोजनाएं (95,404 हेक्टेयर क्षेत्र)
• 103 आदिवासी विकास परियोजनाएं, जिससे 78,000 से अधिक परिवारों को लाभ
• 426 किसान उत्पादक संगठन (FPO), जिनसे 2.26 लाख किसान जुड़े
• 4,535 PACS का कम्प्यूटरीकरण, जिससे मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है
वार्षिक क्रेडिट योजना को मिलेगी दिशा
स्टेट क्रेडिट सेमिनार के जरिए नाबार्ड का उद्देश्य ACP 2026-27 को अंतिम रूप देना है, ताकि कृषि, MSME और अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में समय पर और पर्याप्त ऋण उपलब्ध हो सके।
नाबार्ड ने स्पष्ट किया कि वह डिजिटल बैंकिंग, ग्रामीण ढांचा, सहभागी योजना और समावेशी विकास के माध्यम से मध्य प्रदेश में स्थायी ग्रामीण समृद्धि के लिए लगातार काम करता रहेगा।
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