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एग्रीकल्चर मशीन (Agriculture Machinery)राज्य कृषि समाचार (State News)

बुरहानपुर जिले के प्रतीक ने खोला कस्टम हायरिंग सेंटर  

किसानों को मिल रही कृषि यंत्रों की सुविधा

31 जनवरी 2026, बुरहानपुर: बुरहानपुर जिले के प्रतीक ने खोला कस्टम हायरिंग सेंटर  – कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण के माध्यम से न केवल उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे है। ऐसी ही कहानी बुरहानपुर जिले के ग्राम टिटगाँवकलां के युवा श्री प्रतीक पाटील की है। प्रतीक के पिता किसान है। प्रतीक अपने पिताजी के साथ कई वर्षों से कृषि कार्य कर रहे है, वे मुख्य रूप से केला, चना, मक्का, गन्ना, सोयाबीन, तुअर, गेहूं, केला, प्याज आदि फसल लगाते है।

प्रतीक बताते  हैं  कि खेती के दौरान महसूस किया कि गांवों में समय पर  ट्रैक्टर  और आधुनिक कृषि यंत्रों की अनुपलब्धता किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। इससे न केवल खेती में देरी होती है, बल्कि उत्पादन भी प्रभावित होता है। उन्होंने सोचा क्यों न मैं कृषि यंत्रों की मदद से अपने कार्य को आसान और सुविधाजनक बना पाऊँ। प्रतीक ने कृषि कार्य में आधुनिक  तकनीकों को जोड़कर आजीविका और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का इरादा बनाया।

कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से हुआ चयन –  प्रतीक बताते  हैं  कि, मुझे कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित निजी कस्टम हायरिंग स्कीम की जानकारी सहायक कृषि यंत्री कार्यालय, बुरहानपुर से प्राप्त हुई। इस योजना ने प्रतीक के सपनों को नई दिशा दी। योजना का लाभ लेने के लिये प्रतीक ने ऑनलाइन आवेदन किया और कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित  हुए।

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योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर –  प्रतीक पाटील ने बताया कि मुझे योजना के तहत करीब 20.5 लाख की परियोजना लागत पर ऋण स्वीकृत हुआ। इससे मैंने अक्टूबर, 2025 में ‘‘गुरूकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र’’ नाम से  ट्रैक्टर  सहित आधुनिक कृषि यंत्र क्रय कर निजी कस्टम हायरिंग केन्द्र की स्थापना की है। अब प्रतीक पाटील अपने गांव एवं आसपास के क्षेत्र के लगभग 40 किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहे हैं। प्रतीक,  केंद्र से  किसानों को  ट्रैक्टर , कल्टीवेटर, रोटावेटर, मल्चिंग मशीन, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, चापकटर, सीड कम फर्टिलाइजर इत्यादि यंत्र उपलब्ध कराते  हैं । बीते दो महीनों में प्रतीक ने करीबन 2.6 लाख से अधिक का कार्य किया है। कस्टम हायरिंग योजना से न केवल प्रतीक को लाभ मिला है ,बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी फायदा हुआ है। कस्टम हायरिंग की सुविधा के लिये प्रतीक पाटील कहते हैं कि शासन की इस योजना ने उन्हें स्वरोजगार का अवसर दिया और गांव के अन्य किसानों को भी सशक्त बनाया है। ऐसी योजनाएं ग्रामीण युवाओं को खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत करती हैं। उन्होंने योजना का लाभ मिलने पर शासन एवं प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित किया है।

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कस्टम हायरिंग स्कीम क्या है ? – मध्यप्रदेश में निजी कस्टम हायरिंग स्कीम अंतर्गत कृषकों को कृषि फसलों हेतु किराये पर ट्रेक्टर एवं आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराकर सेवाएं देने के उद्देश्य से बैंक ऋण आधार पर केन्द्र स्थापित करवाये जाते है। यह योजना वर्ष 2012-13 से संचालनालय कृषि अभियांत्रिकी, मध्यप्रदेश के तहत संचालित है और इसका उद्देश्य छोटे व सीमांत किसानों को उचित दरों पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराना, उत्पादकता बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं हेतु कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन करना है। ट्रेक्टर एवं कृषि यंत्रों के क्रय की लागत अधिकतम 25 लाख एवं सभी श्रेणी के आवेदकों हेतु लगभग 40 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख तक का अनुदान देय है। योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आंमत्रित किये जाते है एवं कंप्यूटराइज्ड लाटरी के माध्यम से आवेदकों का चयन किया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिये निर्धारित दस्तावेजों में आवेदक के पास जमीन का कागज बी-1 या मूलनिवासी प्रमाण पत्र, 12 वी पास, आयु 18 से 40 वर्ष, जाति प्रमाण पत्र (आरक्षित श्रेणी के लिये), आधार कार्ड होना आवश्यक है वहीं आवेदक के नाम से राशि रूपये 10,000 का डिमांड ड्राफ्ट देय है I

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