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राज्य कृषि समाचार (State News)

अखिल भारतीय किसान सभा ने गन्ने का मूल्य 575 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की

17 अक्टूबर 2026, भोपाल: अखिल भारतीय किसान सभा ने गन्ने का मूल्य 575 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की – अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने गन्ने का कानूनी रूप से गारंटीकृत मूल्य कम से कम 575 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की है। संगठन ने गन्ना किसानों की मांगों और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति के पुनर्गठन की भी मांग की है।

किसान सभा ने महाराष्ट्र के दक्षिणी क्षेत्रों और उत्तरी कर्नाटक के गन्ना उत्पादकों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार को समिति गठित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद कर रहे हैं।

गन्ना समिति की संरचना पर उठाए सवाल

अखिल भारतीय किसान सभा ने समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें किसान संगठनों, गन्ना उत्पादक राज्यों की सरकारों और स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों का प्रतिनिधित्व नहीं है। संगठन ने प्रो. रमेश चंद की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई और उनके पूर्व में तीन कृषि कानूनों के समर्थन का हवाला दिया।

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AIKS के अनुसार, समिति के विचारार्थ विषयों में किसानों को मिलने वाले मूल्य को चीनी मिलों की वित्तीय व्यवहार्यता से जोड़ा गया है। संगठन का कहना है कि इससे गन्ना मूल्य निर्धारण में मिल मालिकों के हितों को प्राथमिकता मिलने की आशंका है।

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किसान सभा ने यह भी कहा कि समिति को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है, जबकि गन्ना पेराई सत्र 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। संगठन ने समिति में गन्ना उत्पादक संगठनों, संबंधित राज्य सरकारों और स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों को शामिल करने की मांग की है।

गन्ने के मूल्य निर्धारण फॉर्मूले में बदलाव की मांग

AIKS ने वर्ष 2026-27 के चीनी सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किए जाने पर सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, मौजूदा गणना पद्धति किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती।

किसान सभा ने गन्ने का मूल्य कम से कम 575 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि उत्पादन लागत की गणना में पुरानी मूल्य सूचकांक व्यवस्था और फसल की पैदावार से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की जानी चाहिए।

AIKS ने गन्ने के मूल्य निर्धारण में चीनी की रिकवरी दर 10.25 प्रतिशत के बजाय 9 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, संगठन ने चीनी, इथेनॉल, बिजली और बायोगैस से होने वाली आय में किसानों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की है।

किसान सभा ने विस्तारित रंगराजन फॉर्मूले के तहत इन उत्पादों से प्राप्त कुल मूल्य का 75 प्रतिशत हिस्सा गन्ना उत्पादकों को देने का सुझाव दिया है।

चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग

किसान सभा ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) मौजूदा 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर कम से कम 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 2019 से नहीं बदला है।

AIKS का तर्क है कि मौजूदा मूल्य व्यवस्था चीनी मिलों की किसानों को बेहतर भुगतान करने की क्षमता को प्रभावित करती है, जबकि पेय पदार्थ और कन्फेक्शनरी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को इसका लाभ मिलता है।

संगठन ने दोहरी मूल्य व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है, जिसके तहत कॉरपोरेट खरीदारों से चीनी की अधिक कीमत ली जाए और अतिरिक्त आय का लाभ गन्ना किसानों को दिया जाए।

सभी खरीफ और रबी फसलों के लिए C2+50% पर MSP की मांग

गन्ने के अलावा, अखिल भारतीय किसान सभा ने सभी खरीफ और रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को उत्पादन लागत C2 पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर निर्धारित करने और इसके तहत खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग की है।

संगठन ने कपास, सोयाबीन, गेहूं और चने का उदाहरण देते हुए कहा कि घोषित MSP और उत्पादन लागत के बीच अंतर है। AIKS के अनुसार, मौजूदा मूल्य निर्धारण व्यवस्था किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप पर्याप्त लाभ सुनिश्चित नहीं करती।

किसान सभा ने सभी राज्यों में खेत स्तर पर उत्पादन लागत का आकलन करने, किसान संगठनों की भागीदारी के साथ सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने और लागत संबंधी आंकड़े हर वर्ष प्रकाशित करने की मांग भी की है।

गन्ना बकाया भुगतान और 30 दिन में रिपोर्ट जारी करने की मांग

AIKS ने गन्ने के लंबित FRP बकाये का 15 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने की मांग की है। संगठन ने यांत्रिक कटाई के नाम पर होने वाली कटौतियां बंद करने तथा किसानों की निगरानी में तौल और चीनी रिकवरी की जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।

किसान सभा की प्रमुख मांगों में समिति का पुनर्गठन, सभी राज्यों से उत्पादन लागत के पारदर्शी आंकड़े जुटाना और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाना शामिल है। संगठन ने समिति से 30 दिनों के भीतर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने और सिफारिशों को मौजूदा पेराई सत्र से लागू करने की मांग की है।

AIKS ने समिति से मुलाकात का समय मांगा है। संगठन ने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वह संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और अन्य संगठनों के साथ मिलकर चीनी मिलों, मंडियों और गांवों में आंदोलन तेज करेगा।

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