छिंदवाड़ा : आधुनिक तकनीक से नवीन ने बकरी पालन को बनाया लाभकारी व्यवसाय
17 अक्टूबर 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा : आधुनिक तकनीक से नवीन ने बकरी पालन को बनाया लाभकारी व्यवसाय – कृषि और पशुपालन में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और शासकीय योजनाओं का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध करा रहा है। इसका उदाहरण छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखंड के ग्राम बांकानागनपुर के श्री नवीन रघुवंशी हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना का लाभ लेकर बकरी पालन को एक व्यवस्थित एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया है। उनका फार्म आधुनिक पशुपालन पद्धतियों, उन्नत नस्लों और बेहतर प्रबंधन के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है।
500 से अधिक बकरियों के साथ विकसित किया आधुनिक फार्म – श्री नवीन रघुवंशी के बकरी फार्म में विभिन्न नस्लों की 500 से अधिक बकरियां, बकरे और उनके बच्चे हैं। पशुओं की देखभाल और बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए फार्म में अलग-अलग व्यवस्था की गई हैं। बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखने के लिए पृथक क्वारंटाइन शेड बनाया गया है, जबकि बकरी के बच्चों के लिए अलग कमरे की व्यवस्था है। बकरियों के बैठने के लिए जमीन से लगभग चार फीट की ऊंचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। इस प्लेटफार्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी पालन भी किया जा रहा है, जिससे एक ही परिसर में पशुपालन के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है।
एक करोड़ रुपये की परियोजना में 50 लाख रुपये का अनुदान – श्री रघुवंशी के अनुसार, बकरी फार्म की कुल लागत लगभग एक करोड़ रुपये है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा इसके लिए 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। शासकीय सहायता से फॉर्म में आवश्यक संसाधन विकसित करने और पशुपालन को व्यवस्थित स्वरूप देने में मदद मिली है। यह पहल दर्शाती है कि योजनाओं का उचित लाभ लेकर पशुपालन को बड़े स्तर पर रोजगार और व्यवसाय का माध्यम बनाया जा सकता है।
पशुओं के पोषण और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान – फार्म में बकरियों के बेहतर पोषण के लिए नेपियर घास की तीन अलग-अलग किस्मों का उत्पादन किया जा रहा है। पशुओं के लिए संतुलित आहार तैयार करने के उद्देश्य से दाना बनाने की मशीन और चारा काटने के लिए चैफ कटर भी उपलब्ध हैं। नस्ल सुधार और बेहतर प्रजनन के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत लगभग दो लाख रुपये है। हरे चारे, संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादन को बेहतर बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बकरी पालन के साथ प्राकृतिक खेती का समन्वय – श्री रघुवंशी अपने फार्म में बकरी पालन के साथ प्राकृतिक खेती भी कर रहे हैं। इस व्यवस्था से उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और खेती की लागत कम करने की संभावनाओं को बढ़ावा मिला है। पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने की इस पहल का कृषि विभाग द्वारा भी अवलोकन किया गया है। पशुपालन और प्राकृतिक खेती को एक साथ आगे बढ़ाने का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका के विविध अवसरों को दर्शाता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से कृषि-पशुपालन का प्रचार – श्री नवीन रघुवंशी के पुत्र श्री मंथन रघुवंशी भी कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों से योगदान दे रहे हैं। वे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि तकनीकों, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों पर जानकारीपरक वीडियो साझा करते हैं। उनके इंस्टाग्राम पर लगभग 4 लाख 14 हजार और यूट्यूब पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की जा रही जानकारी से कृषि और पशुपालन में रुचि रखने वाले लोगों तक उन्नत तकनीकों एवं व्यावहारिक अनुभवों को पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
‘एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर 2026’ से सम्मानित – कृषि एवं पशुपालन से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यमों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए श्री मंथन रघुवंशी को ‘एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर 2026’ पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। यह उपलब्धि जिले के लिए गौरव का विषय है। नवीन रघुवंशी का आधुनिक बकरी पालन मॉडल और उनके पुत्र का डिजिटल योगदान दर्शाता है कि शासकीय योजनाओं, नई तकनीकों और युवा पीढ़ी की भागीदारी से कृषि एवं पशुपालन को अधिक संभावनाओं वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है।
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