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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश में सक्रिय हुईं कई मौसम प्रणालियां, अगले 3 दिन बारिश-आंधी के आसार; 50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

20 जून 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में सक्रिय हुईं कई मौसम प्रणालियां, अगले 3 दिन बारिश-आंधी के आसार; 50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं – भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान मध्यप्रदेश के शहडोल संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई। वहीं ग्वालियर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में बारिश हुई, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, चंबल, जबलपुर और सागर संभाग के कई जिलों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई। प्रदेश के शेष क्षेत्रों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा। कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और वज्रपात की गतिविधियां भी देखने को मिलीं।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अधिकतम तापमान में विशेष बदलाव नहीं हुआ। रीवा, जबलपुर और शहडोल संभागों में तापमान सामान्य से 1.7 से 2.4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जबकि नर्मदापुरम संभाग में यह सामान्य से 3.3 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया। प्रदेश का सबसे अधिक तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस खजुराहो (छतरपुर) में रिकॉर्ड किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में दर्ज किया गया।

बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो नीमच जिले के सिंगोली में सर्वाधिक 56 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा डिंडोरी के करंजिया में 40.2 मिमी, राजगढ़ के खिलचीपुर में 27.6 मिमी, श्योपुर के बड़ौदा में 27 मिमी, मैहर में 20.1 मिमी तथा अशोकनगर, रीवा, सतना, रतलाम और गुना सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। वहीं शिवपुरी, अशोकनगर, ग्वालियर, भोपाल और रीवा समेत कई जिलों में 40 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक रफ्तार की तेज हवाएं भी चलीं।

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सक्रिय हैं कई मौसम प्रणालियां

मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के हिस्सों तक पहुंच चुकी है। 23 जून के आसपास छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

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इसके अलावा पंजाब से हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक मौसमी ट्रफ सक्रिय है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जबकि एक ट्रफ रेखा पूर्वी उत्तर प्रदेश से पूर्वी मध्यप्रदेश, विदर्भ और दक्षिणी छत्तीसगढ़ होते हुए तटीय आंध्र प्रदेश तक फैली हुई है। पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर पाकिस्तान और उससे लगे जम्मू क्षेत्र के ऊपर सक्रिय बना हुआ है। गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में भी ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ है।

इन जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी

मौसम विभाग ने सीहोर जिले में कहीं-कहीं 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। वहीं अनूपपुर, शहडोल और डिंडोरी जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई गई है।

इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, धार, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

किसानों के लिए विशेष सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वर्षा की संभावना को देखते हुए फिलहाल सिंचाई, उर्वरक प्रयोग और पौध संरक्षण रसायनों के छिड़काव से बचें। खेतों में जलभराव की स्थिति न बने, इसके लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। तेज हवाओं से नुकसान की आशंका को देखते हुए सब्जी फसलों, बेलदार पौधों और युवा फलदार पौधों को सहारा दें।

किसानों को कटाई की गई उपज, बीज, उर्वरक और कृषि यंत्रों को सुरक्षित स्थान पर रखने तथा तिरपाल से ढककर संरक्षित करने की सलाह दी गई है। पॉलीहाउस, नेट हाउस और शेडनेट जैसी संरक्षित खेती की इकाइयों को भी तेज हवाओं से सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम खराब होने की स्थिति में कटाई, मड़ाई और सुखाने संबंधी कार्य स्थगित करने की सलाह दी गई है।

पशुपालकों को पशुओं को सुरक्षित और हवादार आश्रयों में रखने, पर्याप्त चारा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा आंधी-तूफान एवं बिजली गिरने के दौरान खुले में चराई से बचाने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने किसानों से नियमित रूप से मौसम की अद्यतन जानकारी लेते रहने और उसी के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने का आग्रह किया है।

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