अब बीज ही बनेंगे फसल के रक्षक, ICAR की ‘स्मार्ट सीड’ तकनीक से उपज में 30% तक बढ़ोतरी
19 जून 2026, नई दिल्ली: अब बीज ही बनेंगे फसल के रक्षक, ICAR की ‘स्मार्ट सीड’ तकनीक से उपज में 30% तक बढ़ोतरी – जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, सूखा, बढ़ते तापमान और कीट-रोगों की चुनौती के बीच किसानों को बेहतर उत्पादन दिलाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने एक महत्वपूर्ण तकनीक विकसित की है। आईसीएआर-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR), हैदराबाद द्वारा विकसित बायोपॉलीमर आधारित ‘स्मार्ट सीड’ तकनीक फसलों की शुरुआती वृद्धि को मजबूत बनाने और उपज बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है। क्षेत्रीय परीक्षणों में इस तकनीक से फसल उत्पादन में 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
क्या है स्मार्ट सीड तकनीक?
आईसीएआर-आईआईओआर द्वारा विकसित इस तकनीक में बीजों पर जैव-अवक्रमणीय (बायोडिग्रेडेबल) बायोपॉलीमर की एक विशेष परत चढ़ाई जाती है। यह परत बीजों को शुरुआती अवस्था में सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक पोषक तत्व, लाभकारी सूक्ष्मजीव, सूक्ष्म पोषक तत्व और पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले तत्व उपलब्ध कराती है।
यह सुरक्षात्मक परत बीज के आसपास एक अनुकूल वातावरण तैयार करती है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है, जड़ों का विकास मजबूत होता है और पौधे पर्यावरणीय तनावों का बेहतर सामना कर पाते हैं।
परीक्षणों में मिले उत्साहजनक परिणाम
संस्थान द्वारा किसानों के खेतों में किए गए प्रदर्शन और विभिन्न परीक्षणों में इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। तेलंगाना में मूंगफली और सोयाबीन की फसलों पर किए गए प्रदर्शनों में पारंपरिक खेती की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक उपज प्राप्त हुई।
वहीं सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर जैसी फसलों पर किए गए बहु-स्थानिक परीक्षणों में उत्पादकता में 12 से 37 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही अंकुरण क्षमता, पौधों की मजबूती और फसल स्थापना में भी सुधार देखा गया।
वर्षा आधारित खेती के लिए फायदेमंद
विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक खासतौर पर वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। मानसून में देरी, सूखा, नमी की कमी और मिट्टी की खराब स्थिति जैसी समस्याएं अक्सर फसल की शुरुआती वृद्धि को प्रभावित करती हैं। स्मार्ट सीड तकनीक इन परिस्थितियों में बीजों की सुरक्षा बढ़ाकर बेहतर फसल स्थापना सुनिश्चित करने में मदद करती है।
कई फसलों में किया जा सकेगा उपयोग
इस तकनीक को अनाज, मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, कपास, चारा फसलों, सब्जियों, मसालों और बागवानी फसलों के लिए भी अनुकूलित किया जा सकता है। यही वजह है कि इसे देशभर की विभिन्न कृषि प्रणालियों के लिए एक बहुउपयोगी तकनीक माना जा रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद
आईसीएआर के वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य की कृषि ऐसी तकनीकों पर आधारित होगी जो हर कृषि इनपुट की दक्षता बढ़ाएं। स्मार्ट सीड तकनीक किसानों को बेहतर अंकुरण, मजबूत फसल, जलवायु तनावों के प्रति अधिक सहनशीलता और अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद कर सकती है। इससे उत्पादन लागत पर नियंत्रण रखते हुए किसानों की आय और लाभप्रदता बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
संस्थान अब इस तकनीक को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने के लिए राज्य बीज निगमों, राष्ट्रीय बीज निगम, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), बीज प्रसंस्करण इकाइयों और निजी बीज कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट सीड तकनीक का व्यापक उपयोग देश की कृषि को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

