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राज्य कृषि समाचार (State News)

धान की खेती का बदलेगा तरीका, बालाघाट-सिवनी में DSR तकनीक से पानी बचाने और लागत घटाने पर जोर

25 अगस्त 2026, भोपाल: धान की खेती का बदलेगा तरीका, बालाघाट-सिवनी में DSR तकनीक से पानी बचाने और लागत घटाने पर जोर – मध्यप्रदेश में जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए धान की खेती में सीधी बुवाई तकनीक यानी DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) को प्रोत्साहित किया जा रहा है। खरीफ 2026 में बालाघाट और सिवनी जिलों में इस तकनीक के माध्यम से पानी एवं कृषि इनपुट के कुशल उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। इसी को लेकर जिला प्रशासन बालाघाट और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में 20 अगस्त को जलवायु-अनुकूल कृषि पर सम्मेलन आयोजित किया गया।

जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की पहल

यह पहल WRI इंडिया के सहयोग से संचालित ‘मध्यप्रदेश में जलवायु-अनुकूल समाधानों के माध्यम से कृषि-परिवर्तन’ परियोजना के तहत की जा रही है। इसका उद्देश्य प्रदेश में अधिक टिकाऊ, जलवायु-लचीली और संसाधन-कुशल कृषि को बढ़ावा देना है। परियोजना के तहत किसानों को DSR सहित अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संयुक्त संचालक एवं सचिव के.एस. नेताम ने कहा कि कृषि को टिकाऊ बनाते समय मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सीधी धान बुवाई के प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया और किसानों व कृषि सखियों से इस तकनीक को अपनाने के अनुभव, चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की।

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2047 तक 25% कृषि भूमि प्राकृतिक खेती में लाने का लक्ष्य

कृषि विभाग प्रदेश की 25 प्रतिशत कृषि भूमि को वर्ष 2047 तक प्राकृतिक खेती की ओर ले जाने के लक्ष्य के अनुरूप टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए कृषि विस्तार अधिकारियों और ATMA के कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जा रहे हैं। कृषि सखियों के माध्यम से किसानों को DSR सहित जलवायु-अनुकूल तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।

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‘धान के कटोरे’ बालाघाट में DSR से पानी बचाने पर जोर

जिला पंचायत बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ ने कहा कि बालाघाट को मध्यप्रदेश का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है और धान की खेती में पानी की अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में DSR तकनीक जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे धान की खेती पर निर्भर किसानों की आजीविका को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

किसानों को समय पर बीज और मशीनरी उपलब्ध कराने की तैयारी

बालाघाट के उपसंचालक कृषि फूलसिंह मालवीय ने बताया कि खरीफ 2026 में DSR को बढ़ावा देने के लिए किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने और आवश्यक मशीनरी तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की गई है। दूरदराज के क्षेत्रों के किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए व्हाट्सऐप सहित विभिन्न माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

टिकाऊ और संसाधन-कुशल खेती पर फोकस

WRI इंडिया की सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, फूड, लैंड एंड वाटर कार्यक्रम प्रमुख डॉ. संप्रिति बरुआ ने कहा कि संस्था मध्यप्रदेश को अधिक संसाधन-कुशल, न्यायसंगत और आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि प्रणाली की ओर आगे बढ़ाने में सहयोग कर रही है। टिकाऊ कृषि पद्धतियों से किसानों की आजीविका बेहतर करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और जलवायु लचीलेपन को मजबूत करने पर जोर है।

सम्मेलन में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, ICAR-ATARI जबलपुर सहित विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान बालाघाट और सिवनी में जलवायु-अनुकूल कृषि, संसाधन दक्षता, किसानों की आजीविका मजबूत करने और DSR सहित अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों के विस्तार की रणनीति पर चर्चा की गई।

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