मध्य प्रदेश में किसानों को बेहतर भाव दिलाने की बड़ी तैयारी, 259 मंडियों में लगेंगे आधुनिक प्लांट
मंडी बोर्ड का मिशन मोड अभियान
21 मई 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश में किसानों को बेहतर भाव दिलाने की बड़ी तैयारी, 259 मंडियों में लगेंगे आधुनिक प्लांट – खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रही, अब गुणवत्ता और वैज्ञानिक मूल्यांकन ही किसानों की आय तय करेंगे। इसी सोच के साथ डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में कृषि मंडियों को आधुनिक और किसान हितैषी बनाने का बड़ा अभियान शुरू किया गया है।

प्रदेश की सभी 259 कृषि उपज मंडियों में क्लीनिंग-ग्रेडिंग प्लांट और आधुनिक अस्सेयिंग लैब स्थापित करने की कार्ययोजना मिशन मोड में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना, पारदर्शिता बढ़ाना और मंडियों को तकनीक से जोड़ना है।
तेज़ी से आगे बढ़ रहा अभियान
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि खरीफ सीजन से पहले मिशन के प्रमुख कार्य पूरे कर लिए जाएंगे, जबकि सम्पूर्ण योजना इस वित्तीय वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि मंडियों में आधुनिक सुविधाएं विकसित होने से किसानों को उपज की साफ-सफाई, गुणवत्ता परीक्षण और वैज्ञानिक ग्रेडिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी फसल को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होगा।
तीन चरणों में बदलेंगी प्रदेश की मंडियां
पहला चरण : बड़ी मंडियों में हाईकैपेसिटी प्लांट
योजना के प्रथम चरण में प्रदेश की 50 बड़ी मंडियों में 5 टीपीएच और 10 टीपीएच क्षमता के आधुनिक क्लीनिंग-ग्रेडिंग प्लांट लगाए जा रहे हैं। यह कार्य केंद्र शासन की आरकेवीवाई योजना के अंतर्गत किया जा रहा है।
20 मंडियों में निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य शुरू हो चुका है, जबकि 30 मंडियों की स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया जारी है। विशेष बात यह है कि एक वर्ष तक किसानों की उपज की निशुल्क क्लीनिंग और ग्रेडिंग की जाएगी।
दूसरा चरण : PPP मॉडल से मध्यम मंडियों का विकास
श्री पुरुषोत्तम ने बताया मध्यम श्रेणी की मंडियों में ई-नाम योजना के तहत PPP (HAM) मॉडल लागू किया जा रहा है। इसके तहत 40 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जबकि शेष निवेश व्यापारी द्वारा किया जाएगा।
व्यापारी मंडी परिसर में 10 वर्षों तक मशीनों का संचालन करेगा और किसानों से मात्र 15 रुपये प्रति क्विंटल की दर से ग्रेडिंग शुल्क लिया जा सकेगा। इससे किसानों को कम लागत में आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी।
तीसरा चरण : छोटी मंडियों तक पहुंचेगी तकनीक
अत्यंत छोटी मंडियों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। यहां 2 टीपीएच क्षमता वाले छोटे क्लीनिंग-ग्रेडिंग प्लांट मंडी बोर्ड निधि से लगाए जाएंगे। इन परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया जारी है और इनमें भी किसानों को एक वर्ष तक निशुल्क सुविधा मिलेगी।
अब 10 मिनट में होगा उपज का वैज्ञानिक परीक्षण
साथ ही मंडी बोर्ड द्वारा मंडियों में आधुनिक अस्सेयिंग लैब भी स्थापित की जा रही हैं। इन प्रयोगशालाओं में उपज की गुणवत्ता, नमी (मॉइस्चर) और कचरे की मात्रा का वैज्ञानिक परीक्षण मात्र 10 मिनट में संभव होगा।
इस पूरी प्रक्रिया को ई-नाम प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे व्यापारी और किसान दोनों ऑनलाइन गुणवत्ता रिपोर्ट देख सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गुणवत्ता आधारित व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। प्रथम चरण में 139 मंडियों में जुलाई से पहले लैब स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विपणन में नई सोच का संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि क्लीनिंग, ग्रेडिंग और वैज्ञानिक परीक्षण की सुविधा मिलने से किसानों की उपज की विश्वसनीयता बढ़ेगी। इससे न केवल मंडियों में प्रतिस्पर्धात्मक बोली लगेगी, बल्कि प्रदेश की कृषि उपज को राष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत पहचान मिलेगी।
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