राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश: शिव नर्सरी में कोकोपीट तकनीक का कमाल, सिर्फ 45 दिनों में तैयार हो रहे पौधे; किसानों को मिल रहा फायदा  

08 मई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: शिव नर्सरी में कोकोपीट तकनीक का कमाल, सिर्फ 45 दिनों में तैयार हो रहे पौधे; किसानों को मिल रहा फायदा – मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के रायपुरिया क्षेत्र में एमआईडीएस संरक्षित खेती योजना के तहत विकसित शिव नर्सरी आधुनिक कृषि तकनीक का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने नर्सरी का निरीक्षण कर यहां तैयार की जा रही संरक्षित खेती की व्यवस्थाओं और तकनीकों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पौध उत्पादन प्रक्रिया और आधुनिक नर्सरी तकनीक की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना लगभग 25 लाख रुपये की लागत से स्थापित की गई है, जिसमें हितग्राही को शासन की योजना के अंतर्गत 50 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ है। इस नर्सरी में संरक्षित वातावरण में विभिन्न फसलों की गुणवत्तापूर्ण सिडलिंग तैयार की जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन सामग्री उपलब्ध हो रही है।

कोकोपीट तकनीक से तेज और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन

शिव नर्सरी में कोकोपीट तकनीक का उपयोग कर पौध तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान में यहां मुख्य रूप से मिर्ची की सिडलिंग तैयार की जा रही है, जिनकी बिक्री भी शुरू हो चुकी है। हितग्राही के अनुसार इस तकनीक के कारण केवल 45 दिनों में ही मजबूत और गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार हो रहे हैं, जो सामान्य खेती की तुलना में काफी तेज प्रक्रिया है।

किसानों के लिए लाभकारी मॉडल

हितग्राही ने बताया कि संरक्षित खेती तकनीक के कारण पौधों की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और वर्तमान में प्रति पौधे पर लगभग 25 प्रतिशत तक लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे न केवल उनकी आर्थिक आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि आसपास के किसानों को भी समय पर गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध हो रहे हैं।

प्रशासन ने बताया मॉडल को प्रेरणादायक

कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने संरक्षित खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने उद्यानिकी विभाग को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ा जाए और संरक्षित खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में कृषि को नई दिशा मिल सके।

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