राज्य कृषि समाचार (State News)

जबलपुर: कृषि अधिकारियों ने धान की फसल का किया अवलोकन, कीट एवं रोग नियंत्रण की सलाह दी

13 सितंबर 2026, जबलपुर: जबलपुर: कृषि अधिकारियों ने धान की फसल का किया अवलोकन, कीट एवं रोग नियंत्रण की सलाह दी – धान की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की स्थिति का जायजा लेने कृषि अधिकारियों ने जबलपुर जिले के पनागर विकासखंड के कई ग्रामों का भ्रमण किया। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास उमेश कटहरे के नेतृत्व में अधिकारियों ने किसानों के खेतों का अवलोकन कर फसल सुरक्षा के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

अधिकारियों ने ग्राम जुनवानी में कृषक सुरेन्द्र नुनिया, ग्राम कालाडूमर में सरपंच प्रदीप पटेल एवं कृषक रामदास पटेल, ग्राम बम्हनौदा में कृषक भोला पटेल तथा ग्राम उर्दुआ कलां में कृषक जितेन्द्र पटेल के खेत का निरीक्षण किया। इस दौरान धान की फसल की वर्तमान स्थिति, कीट एवं रोगों के प्रकोप और किसानों द्वारा अपनाए जा रहे फसल प्रबंधन उपायों की जानकारी ली गई।

धान में ब्राउन प्लांट हॉपर का प्रकोप

अवलोकन के दौरान धान की विभिन्न किस्मों में ब्राउन प्लांट हॉपर का प्रकोप पाया गया। इसके अलावा कुछ खेतों में अन्य कीट एवं रोगों के लक्षण भी दिखाई दिए। अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि धान के पौधों के निचले हिस्से और तने के पास नियमित निगरानी करें। कीटों का प्रकोप अधिक होने पर ही अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें।

ब्राउन प्लांट हॉपर की स्थिति में खेत में अनावश्यक रूप से पानी भरा न रखने और जरूरत पड़ने पर 3-4 दिन के लिए पानी निकालकर खेत को सुखाने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अत्यधिक नत्रजन का उपयोग, घनी फसल और लगातार पानी भरे रहने से इस कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। शुरुआती अवस्था में नीम आधारित उत्पाद या नीम तेल जैसे जैविक विकल्पों का उपयोग भी समेकित कीट प्रबंधन के तहत किया जा सकता है।

अधिक प्रकोप होने पर इन उपायों की सलाह

ब्राउन प्लांट हॉपर का प्रकोप अधिक होने पर कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार पाइमेट्रोजिन आधारित उत्पाद या अन्य अनुशंसित कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है। धान के तना छेदक और लीफ फोल्डर के नियंत्रण के लिए खेत में नियमित निगरानी, फेरोमोन ट्रैप और जरूरत के अनुसार जैविक नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई।

ब्लास्ट और शीथ ब्लाइट से बचाव

धान में ब्लास्ट रोग की रोकथाम के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन, खेत की नियमित निगरानी और रोग की शुरुआती अवस्था में अनुशंसित फफूंदनाशी के उपयोग की सलाह दी गई। वहीं, शीथ ब्लाइट की स्थिति में खेत में अत्यधिक नमी और घनी फसल से बचने तथा रोग के लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित फफूंदनाशी का उपयोग करने को कहा गया।

एक ही रसायन का बार-बार न करें इस्तेमाल

कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि एक ही रसायन का बार-बार उपयोग न करें। कीटनाशक और फफूंदनाशी की अनुशंसित मात्रा का ही इस्तेमाल किया जाए और जरूरत के अनुसार अलग-अलग रसायन समूहों का क्रमवार उपयोग किया जाए। जैविक विकल्पों में नीम आधारित उत्पाद, ट्राइकोडर्मा और अन्य अनुशंसित जैव-नियंत्रण एजेंटों को समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन में शामिल किया जा सकता है।

अधिकारियों ने किसानों से कहा कि फसल में किसी भी कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर बिना पहचान के कीटनाशक का प्रयोग न करें। संबंधित कृषि अधिकारी से सलाह लेकर ही अनुशंसित दवा और उसकी मात्रा का उपयोग करें। फसल अवलोकन के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पंकज शर्मा और कृषि विस्तार अधिकारी एस. जी. मनजी भी मौजूद रहे।

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