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राज्य कृषि समाचार (State News)

सिमडेगा की दयामनी ने बत्तख और बकरी पालन से बदली अपनी आर्थिक स्थिति

13 सितंबर 2026, सिमडेगा(झारखंड): सिमडेगा की दयामनी ने बत्तख और बकरी पालन से बदली अपनी आर्थिक स्थिति – जिले के तेसई प्रखंड के पथरीटोली गांव की दयामनी किंडो ने साबित किया है कि थोड़ी सी मदद और सही मार्गदर्शन मिले तो गांव की महिलाएं भी अपने घर की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की मदद से बत्तख और बकरी पालन शुरू करने वाली दयामनी अब सालाना करीब ₹94,600 कमा रही हैं।

दयामनी वर्ष 2020 में गांव के कमल स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। शुरुआत में वह समूह की नियमित बैठकों में हिस्सा लेती थीं और छोटी-मोटी बचत करती थीं। धीरे-धीरे समूह से मिले ₹32,000 के ऋण की मदद से उन्होंने आजीविका की गतिविधियां शुरू कीं। सितंबर 2025 में उन्होंने सरकारी हार्डनिंग सेंटर से 40 बत्तख के चूजे लेकर बत्तख पालन शुरू किया और साथ ही समूह के सहयोग से बकरी पालन का काम भी बढ़ाया।

बत्तख पालन में दयामनी को स्थानीय स्तर पर चारा और साफ पानी की व्यवस्था करनी पड़ी, जबकि बकरियों के लिए उन्होंने गांव में ही उपलब्ध चारे और छोटे बाड़े का इस्तेमाल किया। इस तरह उन्हें बहुत बड़े निवेश की जरूरत नहीं पड़ी और काम धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।

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कमाई का हिसाब और आगे की राह

दयामनी की कुल कमाई ₹94,600 में बत्तख और अंडों की बिक्री से ₹20,000, बकरी व मांस की बिक्री से ₹52,000, जबकि कृषि सखी और अन्य कृषि गतिविधियों से ₹22,600 शामिल हैं। दयामनी बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह की सदस्यता, मिले ऋण, विभिन्न योजनाओं के सहयोग और जेएसएलपीएस के मार्गदर्शन ने उनकी आजीविका को काफी मजबूत बनाया है।

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उनकी इस सफलता का असर आसपास के परिवारों पर भी दिख रहा है और कई पड़ोसी महिलाएं भी अब इसी तरह की गतिविधियां अपनाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। समूह की अन्य महिलाएं भी अब दयामनी से बत्तख और बकरी पालन के तौर-तरीके सीखने आ रही हैं, जिससे यह मॉडल आसपास के गांवों में भी फैलने की उम्मीद है।

दयामनी अब आगे अपने बत्तख और बकरियों की संख्या और बढ़ाने की योजना बना रही हैं। साथ ही वह गांव की अन्य महिलाओं को समूह से जुड़ने और छोटी बचत की आदत डालने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं, ताकि वे भी अपनी आजीविका खुद मजबूत कर सकें।

जेएसएलपीएस झारखंड में ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें छोटी बचत, आपसी ऋण और आजीविका की गतिविधियों के लिए तकनीकी सहयोग देने का काम करता है। दयामनी जैसी महिलाओं को समूह के जरिए ही बत्तख पालन के लिए हार्डनिंग सेंटर से चूजे और बकरी पालन के लिए शुरुआती मार्गदर्शन मिला, जिसके बाद उन्होंने खुद अपने स्तर पर इसे आगे बढ़ाया।

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