सरकारी योजना: हरियाणा में धान की सरकारी खरीद तेज, किसानों के खाते में पहुंचे 4,263 करोड़ रुपए
29 अक्टूबर 2026, कुरुक्षेत्र (हरियाणा): सरकारी योजना: हरियाणा में धान की सरकारी खरीद तेज, किसानों के खाते में पहुंचे 4,263 करोड़ रुपए – हरियाणा में खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान धान की सरकारी खरीद तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर धान बेचने वाले 2 लाख 22 हजार 154 किसानों के बैंक खातों में सीधे करीब 4,263 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए हैं।
यह जानकारी हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर के हवाले से सामने आई है। मंत्री के मुताबिक राज्य सरकार धान की खरीद को सुचारू, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और कोशिश यह है कि किसानों को उनकी उपज की सही कीमत बिना देरी के मिल जाए।
कुरुक्षेत्र सबसे आगे, 53 फीसदी लक्ष्य पूरा
सोमवार सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक राज्य की मंडियों में अब तक करीब 37.27 लाख टन धान पहुंच चुका है, जिसमें से लगभग 30.69 लाख टन की खरीद हो चुकी है। केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए हरियाणा से 58 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है, और इस हिसाब से अभी तक करीब 53 फीसदी लक्ष्य पूरा हो चुका है।
जिलेवार आंकड़ों में कुरुक्षेत्र जिला सबसे आगे है, जहां मंडियों में 8.23 लाख टन धान पहुंचा और 7.64 लाख टन की खरीद हो चुकी है। इसके बाद कैथल जिले का नंबर आता है, जहां 6.76 लाख टन आवक के मुकाबले 5.94 लाख टन की खरीद दर्ज हुई। करनाल जिले में 5.60 लाख टन आवक के मुकाबले 4.32 लाख टन धान खरीदा जा चुका है।
खरीद के साथ-साथ मंडियों से धान का उठान भी जारी है। कुरुक्षेत्र में करीब 6.47 लाख टन, कैथल में साढ़े चार लाख टन से ज्यादा और करनाल में पौने तीन लाख टन से ज्यादा धान का उठान हो चुका है, जिससे मंडियों में जगह बनी रहे और किसानों को उपज रखने में दिक्कत न हो।
राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भुगतान की प्रक्रिया को लगातार तेज किया जा रहा है, ताकि किसानों को मंडी में उपज बेचने के तुरंत बाद पैसा मिल सके। इससे किसानों को आगे की रबी बुवाई के लिए बीज, खाद और अन्य खर्चों के लिए समय पर नकदी मिलने में मदद मिल रही है।
धान की खरीद का यह आंकड़ा दिखाता है कि इस सीजन में हरियाणा के किसानों को मंडियों में अपनी उपज बेचने में पहले की तुलना में कम इंतजार करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे बाकी जिलों में भी धान की आवक बढ़ेगी, खरीद और भुगतान के आंकड़े और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
किसानों के लिए समय पर भुगतान क्यों जरूरी
धान की फसल बेचने के बाद किसानों को तुरंत नकदी की जरूरत होती है, क्योंकि यही वह समय होता है जब वे रबी की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं। गेहूं, सरसों और चने जैसी रबी फसलों के लिए बीज, खाद और सिंचाई का इंतजाम इसी दौरान करना होता है, इसलिए खाते में सीधे पैसा पहुंचना किसानों के लिए बड़ी राहत की बात है।
पहले के वर्षों में कई बार ऐसी शिकायतें आती थीं कि मंडी में उपज बिकने के बाद भी किसानों को भुगतान के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता था। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में पैसा भेजने की व्यवस्था से इस तरह की देरी और बिचौलियों की भूमिका दोनों में कमी आई है।
मंडियों में धान की आवक अभी जारी है, और आने वाले हफ्तों में प्रदेश के बाकी हिस्सों से भी बड़ी मात्रा में उपज मंडियों तक पहुंचने की संभावना है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खरीद केंद्रों पर किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पर्याप्त बारदाना, तौल कांटे और भंडारण की व्यवस्था पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
जिन जिलों में अभी खरीद धीमी है, वहां प्रशासन की ओर से अतिरिक्त खरीद केंद्र खोलने और मंडियों में स्टाफ बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है, ताकि दिसंबर तक पूरे राज्य में तय लक्ष्य के मुताबिक खरीद पूरी हो सके।
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