मप्र में उर्वरक माफिया के हौसले बुलंद

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सील बंद गोदाम से कई टन माल हटाया, एफआईआर दर्ज

  • (विशेष प्रतिनिधि)

15 फरवरी 2022, इंदौर ।  मप्र में उर्वरक माफिया के हौसले बुलंद मप्र में किसानों को अमानक उर्वरक बेचने के मामले तो प्राय: सामने आते रहे हैं, लेकिन अब उर्वरक माफिया के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा सीलबंद किए गोदाम की सील तोडक़र गोदाम में रखा उर्वरक और अन्य उत्पाद भी हटा दिया गया। इस सनसनीखेज मामले में नवशक्ति बॉयो क्रॉप केयर साइंस, ढाबली के संचालक मनोज भदौरिया के खिलाफ लसूडिय़ा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

सांवेर के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और उर्वरक निरीक्षक श्री राजेश धारे ने कृषक जगत को बताया कि गत 28 जनवरी को वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उप संचालक कृषि और जिला स्तरीय गुण नियंत्रण दल द्वारा नवशक्ति बॉयो क्रॉप केयर साइंस मांगलिया के संचालक मनोज भदौरिया के तीन गोदामों का औचक निरीक्षण किया था, जहाँ उर्वरक तथा बॉयो उत्पाद धरती पावर और अन्य उत्पाद अवैध रूप से भंडारित किया गया था। इस मामले में संचालक मनोज भदौरिया द्वारा कोई अभिलेख पेश नहीं किए गए। तब तीनों गोदामों को दल द्वारा सील कर दिया गया। 31 जनवरी को जब उक्त गोदामों का पुन: निरीक्षण कर नमूने लेने गए तो वहां तीनों गोदामों पर सील टूटी पाई गई और गोदामों में भंडारित उर्वरक और अन्य उत्पादों को गोदामों से हटा दिया गया। संचालक का यह कृत्य साक्ष्य मिटाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की श्रेणी का होने से संचालक मनोज पिता भगवानदास भदौरिया निवासी बीई -1 , सिंगापुर ब्रिटिश पार्क, ढाबली, इंदौर के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 7, (लायसेंस नहीं), धारा 28 (1) (असहयोग) 28(4) (जानकारी नहीं देना) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7 के तहत थाना लसूडिय़ा जिला इंदौर में 1 फरवरी को एफआईआर दर्ज कराई गई। बता दें कि भदौरिया के गोदाम में एनपीके 19:19:19 का 1875 किलो, सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक सल्फेट 33 प्रतिशत आदि का 885 किलो तथा बॉयो उत्पाद धरती पावर और अन्य उत्पादों की 2870 किलो कुल मात्रा 5630 किलो का अवैध भंडारण पाया गया।
विभाग की कार्यशैली पर सवाल

यहां यह बात गौर करने लायक है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई विक्रेता सरकारी अधिकारियों द्वारा सील किए गए गोदाम की सील तोडक़र माल हटाने का इतना बड़ा दु:साहस नहीं कर सकता है। इस मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राय: आदान विक्रेताओं की छोटी-मोटी गलती पर लायसेंस निलंबित करने वाले कृषि विभाग को यह भी पता नहीं है कि आरोपी यहाँ कब से उर्वरक का अवैध विक्रय कर रहा था, क्योंकि विभाग के पास संचालक के व्यवसाय से संबंधित कोई जानकारी ही नहीं है। कहा जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व ही उसने इस क्षेत्र में अवैध भंडारण किया था। ऐसे में इस विक्रेता द्वारा कितने किसानों को अमानक उर्वरक बेच दिया होगा ? इससे किसानों को हुई हानि का आकलन कैसे किया जाएगा ? यहाँ विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब गोदाम का निरीक्षण किया गया तभी उर्वरक और अन्य उत्पाद के नमूने एकत्रित क्यों नहीं किए गए? तीन दिन बाद जब गोदाम का पुन: निरीक्षण करने पर गोदाम की सील टूटी पाई गई और गोदाम से माल गायब पाया गया, संचालक ने पंचनामे पर दस्तखत नहीं किए, कोई अभिलेख भी नहीं दिए तो कृषि विभाग के अभियोजन पक्ष की कार्रवाई कमजोर नहीं हो जाएगी ? क्या ऐसे में आरोपी संचालक को कृषि विभाग सजा दिला पाएगा ? अभी तो हालात यह हैं कि एफआईआर के 10 दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। ऐसे में यह मामला कितना लम्बा चलेगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। किसान हित की आड़ में शुभ-लाभ पाने के चक्कर में प्राय: देवास नाका क्षेत्र में सरकारी गाडिय़ां दौड़ाने वाला अमला इस मामले को कितना गंभीरता से ले रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि जब कृषक जगत ने इस मामले में इंदौर के उप संचालक कृषि श्री एसएस राजपूत से विभाग का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने मामले को टाल दिया। जबकि होना तो यह चाहिए कि कृषि विभाग को आरोपी संचालक के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए कि यह मामला एक नजीर बन जाए।

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