विदिशा में किसान संगोष्ठी आयोजित, जैविक खेती, सोयाबीन फसल सुरक्षा और नरवाई प्रबंधन पर मिली तकनीकी जानकारी
16 सितंबर 2026, नई दिल्ली: विदिशा में किसान संगोष्ठी आयोजित, जैविक खेती, सोयाबीन फसल सुरक्षा और नरवाई प्रबंधन पर मिली तकनीकी जानकारी – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में कृषकों को उन्नत, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत वर्धा में किसान संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें कृषि विभाग और ITC सुनहरा कल मिशन के प्रतिनिधियों ने किसानों को जैविक खेती, सोयाबीन में कीट एवं रोग प्रबंधन, नरवाई प्रबंधन और विभिन्न कृषक हितैषी शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
जैविक खेती के फायदे बताए
कृषि विस्तार अधिकारी राघवेंद्र अहिरवार ने किसानों को जैविक खेती के महत्व और इसके दीर्घकालीन लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और जैविक गतिविधियों को बनाए रखने में मदद मिलती है। स्थानीय संसाधनों और फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग से कृषि लागत कम करने की दिशा में भी प्रयास किया जा सकता है। किसानों को खेत में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने, फसल अवशेषों का उचित उपयोग करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी गई।
सोयाबीन में कीट-रोग प्रबंधन की जानकारी
श्री अहिरवार ने सोयाबीन फसल में पाए जाने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान और उनके नियंत्रण के उपाय बताए। उन्होंने किसानों से फसल का नियमित निरीक्षण करने और शुरुआती अवस्था में कीट एवं रोग के लक्षणों की पहचान कर उचित प्रबंधन अपनाने की अपील की। उन्होंने अनावश्यक और अत्यधिक रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल से बचते हुए आवश्यकता के अनुसार समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन पद्धति अपनाने पर जोर दिया। इससे फसल की सुरक्षा के साथ उत्पादन लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
नरवाई नहीं जलाने की समझाइश
संगोष्ठी में किसानों को नरवाई और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। किसानों से फसल अवशेषों को खेत में जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने की समझाइश दी गई। बताया गया कि फसल अवशेषों का खेत में जैविक पदार्थ के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है। नरवाई एवं फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को निःशुल्क बायो-डीकंपोजर भी वितरित किया गया। किसानों को इसके उपयोग की विधि और फसल अवशेषों को खेत में अपघटित करने में इसकी उपयोगिता की जानकारी दी गई।
सरकारी योजनाओं की भी दी जानकारी
कार्यक्रम में ITC सुनहरा कल मिशन के श्री मनोज शर्मा और श्री शिवराज किरार ने कृषि एवं कृषक कल्याण से संबंधित विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी। किसानों को पात्रतानुसार योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई गई।
संगोष्ठी के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याएं और जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के सामने रखीं। कृषि विभाग के अधिकारियों और ITC सुनहरा कल मिशन के प्रतिनिधियों ने किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
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