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राज्य कृषि समाचार (State News)

जिमीकंद की खेती बनी मुनाफे का सौदा! किसान ने 1 एकड़ में उगाया ‘देशी पनीर’ कहलाने वाला यह कंद, 40-50 रुपये किलो तक मिलता है भाव

14 जुलाई 2026, भोपाल: जिमीकंद की खेती बनी मुनाफे का सौदा! किसान ने 1 एकड़ में उगाया ‘देशी पनीर’ कहलाने वाला यह कंद, 40-50 रुपये किलो तक मिलता है भाव – धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध बालाघाट जिले में अब किसान पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। जिले के खैरलांजी विकासखंड के ग्राम पुलपुट्टा के हरिटोला निवासी प्रगतिशील किसान हर्षद सोनवाने ने एक एकड़ भूमि पर प्राकृतिक तरीके से जिमीकंद (सूरन) की खेती कर किसानों के सामने आय बढ़ाने का नया विकल्प पेश किया है। बाजार में 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलने वाले भाव के कारण यह फसल अब किसानों के लिए मुनाफे वाली खेती के रूप में उभर रही है।

बालाघाट में बढ़ रही जिमीकंद की खेती

अब तक बालाघाट जिले में जिमीकंद की खेती बड़े स्तर पर नहीं होती थी। अधिकांश ग्रामीण अपने घरों की बाड़ी में घरेलू उपयोग के लिए सूरन उगाते थे, जबकि किरनापुर और लांजी क्षेत्र के कुछ किसान धान के खेतों की मेड़ों पर इसकी खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित करते थे। हालांकि अब बढ़ती मांग और अच्छे बाजार भाव को देखते हुए किसान इसकी व्यावसायिक खेती में भी रुचि दिखा रहे हैं।

प्राकृतिक तरीके से किया उत्पादन

इसी दिशा में किसान हर्षद सोनवाने ने अपने एक एकड़ खेत में पूरी तरह प्राकृतिक पद्धति से जिमीकंद की खेती शुरू की है। इस खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे उत्पादन प्राकृतिक और गुणवत्तापूर्ण होता है। कम लागत में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए बेहतर आर्थिक विकल्प बन रही है।

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‘देशी पनीर’ के नाम से भी जाना जाता है जिमीकंद

जिमीकंद, जिसे सूरन भी कहा जाता है, पोषक तत्वों और खनिजों से भरपूर कंद फसल है। स्वाद और पौष्टिकता के कारण इसे कई क्षेत्रों में ‘देशी पनीर’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है और सामान्यतः 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक भाव मिल जाता है। यही वजह है कि इसे धान जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ देने वाली नकदी फसल माना जा रहा है।

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किसानों के लिए बन सकता है बेहतर विकल्प

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक और प्राकृतिक पद्धति से जिमीकंद की खेती करें, तो कम लागत में अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। बदलते कृषि परिदृश्य में यह फसल धान के साथ आय का मजबूत स्रोत बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार फसल विविधीकरण अपनाकर किसान जोखिम कम करने के साथ अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।

दूसरे किसानों के लिए बनी प्रेरणा

हर्षद सोनवाने का यह प्रयास जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। उनकी पहल यह संदेश देती है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ नई और बाजार आधारित फसलों को अपनाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। कृषि विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में बालाघाट जिले में जिमीकंद की खेती का रकबा बढ़ेगा और अधिक किसान इस नकदी फसल से जुड़ेंगे।

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