राज्य कृषि समाचार (State News)

एक ही खेत से डबल कमाई! झाबुआ के किसान ने अमरूद के साथ उगाए टमाटर, कमा रहा बेहतर मुनाफा

16 मई 2026, भोपाल: एक ही खेत से डबल कमाई! झाबुआ के किसान ने अमरूद के साथ उगाए टमाटर, कमा रहा बेहतर मुनाफा – मेहनत, नई सोच और शासन की योजनाओं का सही उपयोग किसी भी किसान की जिंदगी बदल सकता है। इसका उदाहरण विकासखंड झाबुआ के ग्राम फूल धावड़ी निवासी किसान रमेश वाखला हैं, जिन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी आधारित खेती अपनाई और आज बेहतर आय अर्जित कर अपने परिवार के लिए खुशहाली का नया रास्ता तैयार किया है।

कभी सीमित आय और बढ़ती खेती लागत के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। रमेश पहले मुख्य रूप से सोयाबीन और मक्का की पारंपरिक खेती करते थे। मेहनत अधिक होती थी, लेकिन आमदनी सीमित रहती थी। सोयाबीन की खेती से लगभग 4 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिसमें 7 हजार रुपये लागत लगाने के बाद कुल 15 हजार रुपये की आय होती थी और शुद्ध बचत मात्र 8 हजार रुपये रह जाती थी। वहीं मक्का फसल से 12 क्विंटल उत्पादन पर करीब 23 हजार 500 रुपये की आय होती थी, जिसमें लागत निकालने के बाद केवल 15 हजार 500 रुपये की शुद्ध कमाई बचती थी।

उद्यानिकी योजना बनी नई उम्मीद

ऐसे समय में उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित निजी फलोद्यान योजना रमेश वाखला के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई। वर्ष 2024-25 में उन्हें योजना के तहत अमरूद और टमाटर फसल के लिए 60 हजार रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी सलाह के साथ उन्होंने अपने खेत में आधुनिक तरीके से अमरूद के बगीचे के साथ टमाटर की खेती शुरू की।

शुरुआत में नई खेती को लेकर मन में संकोच था, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगन से खेती की नई तकनीकों को अपनाया। समय पर सिंचाई, उन्नत बीज, पौध संरक्षण और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने का असर जल्द दिखाई देने लगा।

टमाटर की खेती से बढ़ी कमाई

रमेश वाखला को टमाटर की फसल से लगभग 50 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे 1 लाख 25 हजार रुपये की कुल आय अर्जित हुई। करीब 40 हजार रुपये लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 85 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ।

वहीं अमरूद की फसल से 5 क्विंटल उत्पादन प्राप्त कर 35 हजार रुपये की आय हुई। इसमें 17 हजार रुपये लागत निकालने के बाद करीब 18 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित हुई। एक ही खेत में अमरूद और टमाटर की खेती ने उनकी आमदनी में बड़ा बदलाव ला दिया।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

आज रमेश वाखला न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उनकी सफलता को देखकर अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों और आधुनिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

रमेश वाखला बताते हैं कि पहले खेती केवल जीवनयापन का साधन थी, लेकिन अब यही खेती परिवार की खुशहाली और बच्चों के बेहतर भविष्य का आधार बन गई है। उनका कहना है कि शासन की योजना और उद्यानिकी विभाग के सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई है।

आधुनिक खेती से बदल रही किसानों की तस्वीर

रमेश वाखला की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों और शासन की योजनाओं का लाभ लें, तो खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। मेहनत, नवाचार और सही मार्गदर्शन के साथ किसान अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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