राज्य कृषि समाचार (State News)

धान की सीधी बुवाई (DSR): खेत की तैयारी और सही किस्म से बढ़ेगा उत्पादन

12 जून 2026, भोपाल: धान की सीधी बुवाई (DSR): खेत की तैयारी और सही किस्म से बढ़ेगा उत्पादन – धान की खेती को अधिक लाभकारी और संसाधन-सक्षम बनाने के लिए मध्यप्रदेश किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने किसानों को धान की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice–DSR) तकनीक अपनाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार यह तकनीक न केवल पानी और श्रम की बचत करती है, बल्कि समय पर बुवाई होने से उत्पादन में भी बढ़ोतरी संभव है।

कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने बताया कि DSR तकनीक के सफल क्रियान्वयन के लिए खेत का समतल होना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए लेजर लैंड लेवलर का उपयोग सबसे उपयुक्त माना जाता है, हालांकि पारंपरिक जुताई और पाटा विधि से भी खेत को समतल किया जा सकता है। बेहतर समतलीकरण से बीज का समान जमाव और सिंचाई प्रबंधन बेहतर होता है।

DSR में अपनाई जाती हैं दो विधियां

धान की सीधी बुवाई में मुख्य रूप से दो विधियां अपनाई जाती हैं- नम विधि और सूखी विधि।

नम विधि में बुवाई से पहले खेत में सिंचाई कर मिट्टी को तैयार किया जाता है, जबकि सूखी विधि में पहले बीज की बुवाई कर बाद में सिंचाई या वर्षा पर निर्भर रहा जाता है। दोनों ही परिस्थितियों में सीड ड्रिल या जीरो टिलेज मशीन का उपयोग अधिक उपयुक्त माना गया है।

सही समय और किस्म का चयन महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों के अनुसार धान की सीधी बुवाई के लिए 15 से 25 जून का समय सबसे उपयुक्त माना गया है, जो मानसून आगमन से लगभग 10–15 दिन पहले होता है। इस अवधि में बुवाई करने से फसल का विकास बेहतर होता है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है।

जिले के लिए एमटीयू-1010, जेआर-206 और जेआर-21 किस्मों की अनुशंसा की गई है। सामान्य किस्मों के लिए प्रति एकड़ 20–25 किलोग्राम बीज तथा संकर धान के लिए 8–10 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना गया है।

बीज उपचार और बुवाई तकनीक पर जोर

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि बीज को बुवाई से पहले फफूंदनाशी घोल (कार्बेन्डाजिम + मैन्कोजेब) से उपचारित किया जाए, जिससे फसल रोगों से सुरक्षित रह सके।

बुवाई के समय बीज की गहराई 2–3 सेमी और पंक्ति दूरी 18–22.5 सेमी रखने की अनुशंसा की गई है। इससे पौधों का समान विकास होता है और उपज बेहतर मिलती है।

खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान

DSR तकनीक में खरपतवार नियंत्रण एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है। इसके लिए रासायनिक और यांत्रिक दोनों उपाय सुझाए गए हैं। जमाव पूर्व और जमाव के बाद अनुशंसित खरपतवारनाशियों का उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर हाथ से निराई भी करने की सलाह दी गई है, ताकि खरपतवारों में प्रतिरोधकता विकसित न हो।

कृषि विभाग की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे प्रमाणित बीजों का उपयोग करें और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर धान की खेती करें। विभाग का कहना है कि DSR तकनीक अपनाने से खेती की लागत कम होगी और उत्पादन में स्थिरता व वृद्धि दोनों सुनिश्चित की जा सकती हैं।

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