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राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन किसानों के लिए राहत, भावांतर योजना में पंजीयन शुरू; इन केंद्रों पर मुफ्त में करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन

03 अक्टूबर 2026, भोपाल: सोयाबीन किसानों के लिए राहत, भावांतर योजना में पंजीयन शुरू; इन केंद्रों पर मुफ्त में करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन – मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए खरीफ वर्ष 2026 में राहत की खबर है। विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सोयाबीन की फसल को भावांतर योजना के तहत शामिल किया गया है और किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को निर्धारित समय सीमा में अपना पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के लिए किसानों को कई विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।

किसान ग्राम पंचायत स्तर पर स्थापित सुविधा केंद्र, जनपद पंचायत के सुविधा केंद्र, तहसील कार्यालय तथा निर्धारित सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं के पंजीयन केंद्रों पर निःशुल्क पंजीयन करा सकेंगे। इसके अलावा किसान एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), लोक सेवा केंद्र अथवा निजी साइबर कैफे से भी पंजीयन करा सकते हैं। इन निजी केंद्रों पर पंजीयन के लिए अधिकतम 50 रुपये प्रति पंजीयन शुल्क निर्धारित किया गया है।

पंजीयन से पहले दस्तावेज रखें तैयारपंजीयन के दौरान किसान की पहचान और भूमि संबंधी जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। इसलिए किसानों को आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज, फोटो पहचान पत्र, बैंक खाते की जानकारी, बैंक खाता नंबर, आईएफएससी कोड और मोबाइल नंबर आदि तैयार रखने की सलाह दी गई है। दस्तावेजों में जानकारी सही होने से पंजीयन प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है।

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आधार सत्यापन जरूरी

भावांतर योजना के तहत फसल बेचने की प्रक्रिया में आधार सत्यापन आवश्यक रहेगा। किसान आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी अथवा बायोमेट्रिक माध्यम से अपना सत्यापन करा सकते हैं। यदि आधार कार्ड और भू-अभिलेख में दर्ज किसान के नाम में अंतर पाया जाता है तो संबंधित किसान को तहसील कार्यालय के माध्यम से आवश्यक सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद ही पंजीयन को मान्य किया जा सकेगा।

किसानों के लिए जरूरी है कि वे पंजीयन की अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपना पंजीयन करा लें। साथ ही निजी केंद्र से पंजीयन कराने की स्थिति में निर्धारित अधिकतम शुल्क से अधिक राशि नहीं दें। योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन के साथ आधार और भूमि संबंधी जानकारी का सही होना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

मूल्यवर्धित उत्पादों का विस्तार केवल उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इससे दूध के प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने का अवसर भी मिलेगा। ‘सहकार से समृद्धि’ की अवधारणा के तहत तैयार यह संयंत्र मध्य प्रदेश की सहकारी डेयरी व्यवस्था में प्रसंस्करण क्षमता और उत्पाद विविधीकरण को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

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