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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश में बढ़ रहा डेयरी कारोबार, 21वीं पशु संगणना में  उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या हुई लगभग दोगुनी  

15 सितंबर 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में बढ़ रहा डेयरी कारोबार, 21वीं पशु संगणना में  उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या हुई लगभग दोगुनी – मध्यप्रदेश सरकार ने आगामी पांच वर्षों में प्रदेश को “मिल्क कैपिटल” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में प्रदेश में दुग्ध संकलन, पशुओं की उत्पादकता और उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 21वीं पशु संगणना में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या 20वीं पशु संगणना की तुलना में लगभग दोगुनी हुई है।

प्रदेश में पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में दैनिक दुग्ध संकलन 8.73 लाख किलोग्राम से बढ़कर जुलाई 2026 में लगभग 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया। सरकार ने प्रदेश में 26 हजार दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

प्रति पशु उत्पादकता में लगातार सुधार

दुग्ध उत्पादन में वृद्धि का प्रमुख आधार प्रति पशु उत्पादकता में बढ़ोतरी है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार देशी एवं गैर-प्रमाणित मवेशियों की उत्पादकता वर्ष 2014-15 में 927 किलोग्राम प्रति पशु प्रतिवर्ष थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,343.2 किलोग्राम हो गई। इसी अवधि में भैंसों की उत्पादकता 1,880 से बढ़कर 2,365.2 किलोग्राम और गाय के दूध की औसत उत्पादकता 1,648 से बढ़कर 2,251 किलोग्राम प्रति पशु प्रतिवर्ष हुई।

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प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 707 ग्राम

नस्ल सुधार, बेहतर पोषण, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक पशुपालन के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 550 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 707 ग्राम प्रतिदिन हो गई है। यह राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम प्रतिदिन से अधिक है।

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योजनाओं से बढ़ रहा उन्नत नस्ल के पशुओं का प्रसार

विभाग द्वारा मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्नत नस्ल के पशुओं के प्रजनन और प्रसार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से हितग्राही अन्य राज्यों से भी उन्नत नस्ल के पशु प्रदेश में ला रहे हैं।

संतुलित आहार और वैज्ञानिक पशुपालन पर जोर

प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के माध्यम से लगभग 18 लाख परिवारों से संपर्क किया गया है। गोरस ऐप के जरिए पशुपालकों को संतुलित आहार और बेहतर पोषण के बारे में जागरूक किया जा रहा है। साथ ही साइलेज के उत्पादन और उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत साइलेज उत्पादन से संबंधित नए प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं।

सेक्स सॉर्टेड सीमेन से नस्ल सुधार

प्रदेश में नस्ल सुधार के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। इससे लगभग 90 प्रतिशत बछिया पैदा होने की संभावना रहती है। वर्तमान में कुल कृत्रिम गर्भाधान का लगभग 20 प्रतिशत सेक्स सॉर्टेड सीमेन से किया जा रहा है। भोपाल स्थित केंद्रीय वीर्य केंद्र में गिर, साहिवाल, थारपारकर और मुर्रा जैसी उन्नत नस्लों के वीर्य का उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 5लाख डोज प्रतिवर्ष उत्पादन हो रहा है और आगामी वर्षों में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य है।

47.50 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य

हिरण्यगर्भा अभियान के तहत वर्तमान वित्त वर्ष में 47.50 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विगत वर्ष लगभग 28 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए थे। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ही 10.5 लाख से अधिक कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं। आगामी पांच वर्षों में 50 प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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