केला फसल में सीएमवी रोग नियंत्रण के उपाय  

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03 सितम्बर 2022, इंदौर: केला फसल में सीएमवी रोग नियंत्रण के उपाय – वर्तमान स्थिति में केले की फसल पर सीएमवी (ककड़ी मोज़ेक वायरस) रोग का प्रकोप है,  क्योंकि पिछले 15 से 20 दिनों का वातावरण (बादल वाला वातावरण और कम धूप) इस बीमारी को फैलाने वाले कीड़ों के विकास के लिए अनुकूल था, इसलिए इस बीमारी का प्रसार कुछ दिन पहले शुरू हुआ है। पिछले 6 से 7 दिनों से इसके लक्षण केले के पौधे पर दिखाई दे रहे हैं।इस रोग पर नियंत्रण पाने के लिए जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड, जलगाँव ने निम्न उपाय करने की सलाह दी है –

रोग फैलने का कारण और नियंत्रण के उपाय –  सीएमवी रोग एफिड्स, थ्रिप्स, व्हाइटफ्लाई, मक्खी आदि के कारण कीड़ों के माध्यम से घास/पौधे से पौधे में फैलता है। सीएमवी रोग के नियंत्रण के लिए सबसे पहले रोगग्रस्त केले के पेड़ को खोदकर नष्ट कर देना चाहिए।  केले के बगीचे को खरपतवार रहित/खरपतवार मुक्त रखना चाहिए–बगीचे या खेत के तटबंध से सभी घास/खरपतवार हटा दें। किसी भी बेल की फसल (ककड़ी, गिल्की, वाल, दोड़की, दुधिभोला गंगाफल, चवली, करले आदि) के साथ-साथ केले के बगीचे या बगीचे में फसलें/सब्जियां जैसी मिर्च न लगाएं।

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रोग को नियंत्रित करने के लिए 6-7 दिनों के अंतराल पर केले के पौधों पर छिड़काव इस प्रकार करें, बगीचे की बाड़ का भी छिड़काव करें।(रस चूसने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने के लिए आप उपलब्ध कीटनाशकों, कीटनाशक + एसिफेट + नीम के तेल का प्रयोग करें) उदाहरण के लिए – 1 इमिडाक्लोप्रिड- (इमिडा/कॉन्फिडोर) 15 मिली या  2 – एसिटामिप्रिड– (तातामानिक) 8 ग्राम या 3  -थायोमेथोक्सम 25% – (Oct.ra) 10 ग्राम या 4 – प्रोफेनोफोस–20 मिली या 5 – इमिडाक्लोप्रिड-70wg (एडमिर)–5 ग्राम या 6 – फ्लोनिकमाइड – (उलाला) – 8 ग्राम  (या बाजार में कई मिश्रित कीटनाशक उपलब्ध हैं)। इसमें ऐसीफेट – 15 ग्राम + नीम तेल – 30 मिली प्रति 15 लीटर पानी में छिड़काव करें। अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें।  ज़ैदी अज़हर, एग्रोनोमिस्ट (जैन इरीगेशन सिस्टम लि.) मध्य प्रदेश। 9406802841

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